श्रीनगर, नवीन नवाज। कंट्रोल रूम पर सूचना मिलती है कि विदेश से आया एक व्यक्ति क्वारंटाइन का उल्लंघन कर मुहल्ले में रह रहा है। तुरंत स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीम मौके पर दौड़ पड़ती है। साइबर और तकनीकी एक्सपर्ट उस व्यक्ति की मूवमेंट पर नियंत्रण कक्ष से नजर रखते हैं। टीम को अपडेट करते रहते हैं। नियंत्रण कक्ष बार रूम की शक्ल अख्तियार कर चुका है।

कोरोना के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू हो चुकी है। प्रशासन एक-एक संदिग्ध को खोज निकालने में जुटा है। पूरे देश की तरह जम्मू कश्मीर लॉकडाउन है। स्वास्थ्य विभाग और निगम के योद्धा कोरोना के वायरस को जड़ से मिटाने में जुटे ही हैं। पुलिस और उसकी खुफिया विंग के साथ साइबर योद्धाओं भी मुहिम से जोड़ा है। लक्ष्य है कि आपके पड़ोस या आसपास छिपा कोरोना बम आपको या आसपास के लोगों को चपेट में न ले।

चिंता यह है कि बहुत से लोग स्वयं सामने आने की सामाजिक जिम्मेदारी की धज्जियां उड़ाने में जुटे हैं। पुलिस व प्रशासन से निगाह छिपाकर कहीं छिपे हैं। ऐसे लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, परिवार के लिए खतरा बढ़ा रहे हैं। प्रशासन ने पुलिस व स्वास्थ्य कर्मियों के संयुक्त दस्तों के अलावा निगरानी दस्ते भी गठित किए हैं। खुफिया तंत्र को काम में लगाया है। पंचायत व स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों के अलावा, गांवों के नंबरदारों, चौकीदारों और मौलवियों की मदद लेने के अलावा नियंत्रण कक्ष बनाया है। अकेले श्रीनगर के नियंत्रण कक्ष में विदेश यात्रा छिपाकर घरों में छिपे लोगों की एक सप्ताह के दौरान 400 से ज्याद प्राप्त शिकायतें मिली हैं। 170 लोगों को प्रशासन ने क्वारंटाइन केंद्र भेजा है। दर्जनों को घरों में क्वारंटाइन किया है।

50 से ज्यादा निगरानी दस्ते बनाए : विदेश यात्रा करने वाले स्थानीय लोगों का पता लगाने के लिए कश्मीर प्रशासन ने 50 से ज्यादा निगरानी दस्ते बनाए हैं। इनमें पुलिस, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अलावा एक मजिस्ट्रेट शामिल किया है। श्रीनगर में एक नियंत्रण कक्ष भी बनाया है जिसमें आइटी प्रोफेशनल और साइबर एक्सपर्ट का दस्ता भी तैनात किया है। मजहबी नेताओं से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर लोगों से अपील कर संभावित संक्रमित लोगों की पहचान पता लगाने में मदद करें। पंचायत प्रतिनिधियों, निकाय प्रतिनिधियों और गांवों के नबंरदारों व चौकीदारों को जोड़ा गया है।

विदेश यात्रा के बारे में नहीं बताना खतरनाक :

श्रीनगर के जिला उपायुक्त डॉ. शाहिद इकबाल ने बताया कि बार-बार आग्रह और चेतावनी के बावजूद लोग विदेश यात्रा के बारे में नहीं बता रहे। यह बहुत खतरनाक साबित होगा। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि आखिर पढ़े-लिखे लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं। अगर मैं रोज के अनुभव लिखूं तो शायद ही कश्मीर में कोई चैन से सो सकेगा। दो सगे भाई बांग्लादेश में एक ही कॉलेज में पढ़ रहे थे। एक हवाई जहाज से आया और उसने अपनी विदेश यात्रा की जानकारी दी। हमने उसे क्वारंटाइन केंद्र में भेजा। उसका दूसरा भाई सड़क के रास्ते आया और सीधे घर चला गया। वह अपने घर में आराम से बैठा था। इस बीच नियंत्रण कक्ष को उनके सजग पड़ोसी ने सूचित किया। उसमें बीमारी के लक्षण थे। सिर्फ यही नहीं एक अमेरिका से आने वाली एक युवती ने खुद को बांग्लादेश से आई छात्रा बताया। उसे क्वारंटाइन के लिए जब कमरा आवंटित करना था तो असलियत सामने आ गई। 

Posted By: Preeti jha

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