संवाद सहयोगी, आरएसपुरा : बिजली विभाग की लापरवाही इसी कदर है कि सीमांत गांवों में भुगतान की तारीख निकल जाने के बाद उपभोक्ताओं को बिजली बिल थमाए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को तय तारीख के बाद बिल भुगतान के लिए विलंब शुल्क भी चुकाना पड़ रहा है। बिजली विभाग लोगों से समय पर बिजली बिल के भुगतान की अपील तो करता है, लेकिन स्वयं लोगों तक समय पर बिल नहीं पहुंचा पाता है। ऐसे में लोग कैसे समय पर बिल का भुगतान कर सकेंगे। इस तरह की कार्यप्रणाली से बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने शुरू हो गए हैं, वहीं लोगों में भी विभाग के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है।

सीमांत ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मी गांवों में कभी भी समय पर बिल उपलब्ध नहीं करवाते हैं। कई बार गांव में भुगतान की तारीख निकल जाने के दो तो कभी तीन दिन बाद बिल मिलते हैं। इससे सीमांत लोगों को भुगतान करने के लिए अतिरिक्त पैसा विलंब शुल्क के रूप में देना पड़ता है। पूरोबाना गांव निवासी राकेश कुमार ने कहा कि इस बार 27 जनवरी को बिल के भुगतान की अंतिम तारीख थी, मगर बिल 28 जनवरी को मिल है। अब अब विलंब शुल्क के साथ 29 तारीख को बिल का भुगतान किया है।

उन्होंने कहा कि बिजली विभाग हमेशा उपभोक्ताओं से अपील करता है कि बिल भुगतान समय पर करें, लेकिन विभाग की लापरवाही इस कदर है कि लोगों को भुगतान की तारीख निकल जाने के बाद बिल पहुंचाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी तरह दर्जनों सीमांत गांव ऐसे हैं जहां के उपभोक्ताओं को समय पर बिजली के बिल नहीं मिल पा रहे हैं। लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा कि बिजली विभाग अगर आगे से बिल समय पर नहीं मिलेंगे तो लोग भुगतान भी नहीं करेंगे।

उधर, विभागीय एई राजकुमार ने कहा कि हर माह कार्यालय से समय पर बिल भेजे जाते हैं, लेकिन बिल वितरित करने वाले कर्मी की कमी के चलते हो सकता है कि कहीं देरी से पहुंच हो। आगे इसकी निगरानी की जाएगी।

Posted By: Jagran

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