जम्मू, रोहित जंडियाल। चाहे धरती की जन्नत कश्मीर हो या फिर मंदिरों का शहर जम्मू। आज भी छोटी उम्र में बेटियां बालिका वधु बनकर सरकारी दावों की सच्चाई बयां कर रही हैं। जिस उम्र में 'लाडो के हाथ में कापी-पेन होने चाहिए, उनके हाथ शादी की मेंहदी से सज रहे हैं। कुछ वर्षों में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के कई सामने आए हैं। दो दिन पहले राष्ट्र्र के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में बाल विवाह के बढ़ते मामलों का जिक्र किया था। यहां पर गरीबी, अनपढ़ता व माता-पिता में से किसी का देहांत होना बाल विवाह के प्रमुख कारण है। चाइल्ड लाइन जम्मू और ऊधमपुर इकाई ने कई बाल विवाह रुकवाए हैं। उनका दावा है कि आज भी चोरी छिपे बाल विवाह हो रहे हैं। अधिकांश मामले सामने नहीं आते हैं। वहीं नेशनल सर्वे सैंपल ने अपने सर्वे में पाया था कि जम्मू संभाग में बाल विवाह के मामलों में वृद्धि हुई है।

ऊधमपुर जिले में सत्यालता गांव में 15 साल की बच्ची की शादी रुकवाने गए चाइल्ड लाइन ऊधमपुर के कोआर्डिनेटर हरिकृष्ण ने बताया कि गांव में यातायात का कोई साधन नहीं था। कई किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ा। लड़की आगे पढऩा चाहती थी। परिजन शादी पर अड़े हुए थे। बार-बार समझाने पर परिवार माना। वह बच्ची को ऊधमपुर में ले आए और आश्रम में रखवाया। ऊधमपुर के पंचैरी के लांदर क्षेत्र के रंजीत ने बताया कि आज भी कई गांव पिछड़े हैं। बेटी अभी आठवीं में पहुंची होती है तो माता-पिता को शादी की चिंता सताने लगती हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों से जल्द मुक्त होना चाहते हैं। उनके लिए मायने नहीं रखता है कि लड़के की उम्र क्या है।

गरीबी, साक्षरता की कमी

जम्मू कश्मीर में बाल विवाह का प्रमुख कारण गरीबी और साक्षरता दर कम होना है। साल 2011 की जनगणना के अनुसार सिर्फ 58 फीसद महिलाएं ही अभी साक्षर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में 40 फीसद साक्षरता दर है। यही नहीं सरकार बेशक लाडली बेटी योजना चला रही है। गरीबी के कारण परिवारों में बेटी उनके लिए लाडली नहीं बल्कि बोझ है। वह उसकी जल्दी शादी करवाना चाहते हैं।

बाल विवाह के मामले चिंताजनक

जम्मू कश्मीर में बाल अधिकारों पर काम कर रही चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन की राज्य प्रभारी मंजरी सिंह का कहना है कि बाल विवाह के मामलों को रोकने के लिए उनकी संस्था के सदस्य कई जिलों में काम कर रहे हैं। लोगों में जागरूकता की कमी है। कई लोगों के लिए बेटियां अभी भी प्राथमिकता पर नहीं है। वे बेटियों को बोझ समझती हैं। इसलिए उनकी छोटी उम्र में शादी करवा देती हैं। लोगों को जागरूक राज्य प्रशासन के साथ जागरूक किया जा रहा है ताकि वह अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा दिलाकर आत्मनिर्भर बना सकें। गैर सरकारी संस्था एक्शन एड इंडिया ने जम्मू संभाग में बाल विवाह के मामले बढ़े हैं।

चंद मामले हैं जो सामने आए

  • जून 2019 : जम्मू संभाग के ऊधमपुर जिले की रामनगर की पंचायत सतयालता में 15 साल की बच्ची की पटनगढ़ के रहने वाले 25 साल के युवक के साथ शादी हो रही थी। इसकी जानकारी गैर सरकारी संस्था चाइल्ड लाइन ऊधमपुर को मिली तो टीम ने जिला प्रशासन के सहयोग से बच्ची की शादी नहीं होने दी। हैरानगी यह थी कि बच्ची ने इसी साल 8वीं कक्षा में 89 फीसद अंक लिए थे। वह गरीब परिवार से है। चार बहनें हैं। परिजन शादी करवाना चाहते थे।
  • जून 2019 : ऊधमपुर जिले के रामनगर तहसील की सियूना की 16 साल की बच्ची की मजालता के 28 साल के व्यक्ति के साथ शादी हो रही थी। चाइल्ड लाइन ऊधमपुर को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने शादी नहीं होने दी। लड़की के पिता नहीं थे। चार बहनें हैं और मां के पास रुपये नहीं। मां जल्द बेटियों की शादी किसी भी तरह से करवाना चाहती है।
  • जून 2019 : जम्मू के छन्नी हिम्मत में 16 साल की बच्ची की शादी हो रही थी। चाइल्ड लाइन जम्मू और चाइल्ड वेल्फेयर कमेटी को इसकी सूचना मिली तो उन्होंने शादी नहीं होने दी।
  • मई 2018 : ऊधमपुर जिले की तनोड़ी पंचायत की 16 साल की बच्ची जम्मू के गंडाला जखड के रहने वाले 26 साल के युवक के साथ शादी हो रही थी। परिवार गरीब था। किसी भी तरह बेटी की शादी करवाना चाहता था।
  • सितंबर 2017 : ऊधमपुर जिले की चिनैनी नुगालता पंचायत की 14 साल की बच्ची की जम्मू के आरएसपुरा के 40 साल के व्यक्ति से शादी हो रही थी। लड़की के पिता नहीं थे। चाचा के साथ रहती थी। वह उसकी शादी कराना चाहते थे। चाइल्ड लाइन ऊधमपुर ने प्रशासन के सहयोग से शादी नहीं होने दी।

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Posted By: Rahul Sharma

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