जम्मू, जागरण संवाददाता। राज्य की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने साफ किया कि जानीपुर स्थित हाईकोर्ट परिसर को बाहु रैका में शिफ्ट करने का कोई अधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। इसके अलावा न ही इस संदर्भ में कोई औपचारिक आदेश जारी हुआ है। ऐसा कोई भी फैसला लेने से पहले वकीलों के हितों को गंभीरता से लिया जाएगा। इसके अलावा वकीलों की जमीन रजिस्ट्री का अधिकार न्यायपालिका के पास बहाल करने की दूसरी मांग पर गौर करने का विश्वास दिलाया।

गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने बाहु रैका के जंगल की पुकार अभियान चलाकर जंगलों के कटान के मुद्दे को उठाया था। पहली नवंबर से हड़ताल पर गए वकीलों को चीफ जस्टिस ने शुक्रवार को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था।

बार एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट अभिनव शर्मा व अन्य पदाधिकारियों के अलावा कई वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि जमीन रजिस्ट्री का अधिकार न्यायपालिका के पास बहाल करने और हाईकोर्ट परिसर को रैका शिफ्ट करने का प्रस्ताव खारिज करने की मांगों को उठाया। डेढ़ घंटे तक चली बैठक में वकीलों ने कहा कि एक वकील एक ही दिन में हाईकोर्ट में भी पेश होता है। कई युवा वकील ऐसे हैं जो हाईकोर्ट में सीनियर के साथ पेश होकर अनुभव पाते हैं।

अगर हाईकोर्ट रैका में शिफ्ट हो गया तो वकीलों, विशेषकर युवा वकीलों के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। चीफ जस्टिस ने वकीलों की दोनों मुख्य मांगों पर गौर करने का विश्वास दिलाते हुए कहा कि हाईकोर्ट को शिफ्ट करने का अभी तक कोई अधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। चीफ जस्टिस ने बार एसोसिएशन को मांगों के समर्थन में ज्ञापन सौंपने को भी कहा।

Posted By: Rahul Sharma

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