जम्मू, जागरण संवाददाता । खेती अब लगातार बदल रही है। महज हल चलाना ही खेती नहीं रहा। अब तो बीज उत्पादन, कृषि यंत्र, प्रोसेसिंग यूनिट लगाने तक काम बढ़ गया है। ऐसी कई योजनाएं हैं कि किसान भी बीज तैयार कर सकता है। अब ग्रीन हाऊस व और पॉली हाऊस बनने लगे हैं। खेती में मशीनों का इस्तेमाल होने लगा है। कृषि विस्तार होने से किसानों के लिए विकास के रास्ते भी खुल गए हैं। अनेक रोजगार के रास्ते इसमें है।

कृषि विभाग जम्मू के मुख्य कृषि अधिकारी अरविंद्र सिंह रीन ने बताया कि बीज उत्पादन के क्षेत्र में भी किसान कदम बढ़ा सकता है। हमारे पास सीड विलेज कार्यक्रम है जिसके तहत किसान हमारी तकनीकी सहायता लेकर बीज तैयार कर सकता है। सीड विलेज में फांऊडेशन बीज हम देते हैं और बाद में तैयार बीज उठा लेते हैं। इस बार तो हमने बासमती के लिए भी किसानों से बीज तैयार करवाया है। आने वाले समय में हम बीज भंडारण के लिए और ज्यादा सीड प्रोसेसिंग प्लांट लगाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में और ज्यादा बीज स्टोर हो सकेगा। इसलिए आने वाले समय में विभाग अधिक से अधिक किसानों को बीज उत्पादन कार्यक्रम में शामिल कराएगा।

रीन ने बताया कि कोई भी किसान सीड विलेज के तहत बीज उत्पादन करने के लिए आगे आ सकता है। लेकिन किसान के पास जमीन होनी चाहिए। यानि कि अगर किसान व्यक्तिगत तौर पर बीज तैयार करना चाहता है तो सीड विलेज के लिए उसके पास 30-40 कनाल जमीन तो हो। अगर दस किसानों का समूह बीज लगाने का इच्छुक है तो 50 कनाल जमीन तो हो। यह कोई शर्त नही है लेकिन इतनी जमीन तो होनी चाहिए। सीड विलेज के तहत काम करने के लिए किसान क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकता है।

उन्होंने बताया कि अब पॉली हाऊस में भी खेती हो रही है, पनीरी लग रही है। यह खेत में एक प्रकार का ढांचा है जिसको यूवी शीट से कवर किया जाता है। ढांचे के अंदर का वातावरण गर्म रहेगा और तापमान नियंत्रित कर किसान मौसम से पहले सब्जियां प्राप्त कर सकते हैं व अच्छा पैसा बना सकते हैं। पॉली हाऊस बनाने के लिए कृषि विभाग किसानों को 50 प्रतिशत की सब्सिडी भी उपलब्ध कराता है। कई किसान को पाॅली हाऊस में आज हटकर खेती हो रही हैं। यहां सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सबको नौकरी तो नहीं मिल सकती लेकिन युवा यह क्यों नहीं सोचता कि वे खेती के जरिए कई लोगों को रोजगार दे सकता है। बस हिम्मत व नए जमाने की खेती की सोच पालनी होगी, काम की कोई कमी नहीं। क्योंकि कृषि सेक्टर में आने वाला बहुत बेहतर है। क्या ग्रामीण युवा जानते हैं कि अब मशरूम की खेती 12 मासी ही हो गई है। साल के अधिकतम माह मशरूम पैदा हो सकती है। कठुआ क्षेत्र के एक युवा द्वारा तैयार शहद अब एमजान पर बिकता है। कंबाइन मशीनें भी ग्रामीण युवा डाल सकते हैं। क्योंकि कंबाइन मशीन खरीदने पर 8 लाख रुपए तक की सब्सिडी उपलब्ध है। इन सब से ग्रामीण युवाओं को सीख लेनी चाहिए।

Edited By: Vikas