श्रीनगर, नवीन नवाज। केंद्र सरकार कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और हुर्रियत से औपचारिक बातचीत के एलान से पहले ट्रैक -2 पर सभी अलगाववादी संगठनों से अलग-अलग संपर्क कर बातचीत के लिए नींव तैयार करेगी। अलबत्ता, पाक के साथ बातचीत को लेकर केंद्र पाकिस्तान में चुनाव का इंतजार करेगा।

गृहमंत्री राजनाथ सिेह के प्रस्तावित कश्मीर दौरे के बाद इस कवायद को गति दी जाएगी। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कश्मीर समस्या के समाधान के लिए गत दिनों हुर्रियत से बातचीत की इच्छा जताई थी। इसके बाद मंगलवार को ज्वाइंट रजिस्टेंस लीडरशिप (जेआरएल) की अगुआई कर रहे सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक ने बैठक कर वार्ता को नकारते हुए केंद्र से रुख स्पष्ट करने को कहा था।

फिर आतंकी संगठनों के साझा मंच यूनाइटेड जिहाद काउंसिल ने सशर्त वार्ता की बात कही थी। कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार आसिफ कुरैशी ने कहा कि अलगाववादी खेमे ने पहली बार बातचीत से इन्कार नहीं किया है। हालांकि, इस बार उसने शर्तो का उल्लेख करने के बजाय केंद्र से बातचीत का एजेंडा स्पष्ट न होने के कारण इन्कार किया है, जो बड़ा बदलाव है।

इसके अलावा किसी अलगाववादी नेता का कोई अन्य बयान नहीं आया है, जो इस बात का संकेत दे रहा है कि सभी बातचीत के मूड में हैं। अब केंद्र सरकार का अगला कदम ही बातचीत की दिशा तय करेगा।सूत्रों ने बताया कि जेआरएल के बयान से उत्साहित केंद्र सरकार ने भी कश्मीर मुद्दे पर अलगाववादी खेमे के साथ बातचीत की दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। अलगाववादी खेमा बाद में न बिदके, इसलिए पहले ट्रैक-2 पर अलगाववादी नेताओं के साथ बातचीत होगी।

बातचीत केंद्रीय वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा की निगरानी में नई दिल्ली स्थित कुछ पूर्व नौकरशाहों, राजनीतिकों और कश्मीर मुद्दे पर संवाद बहाली के प्रयास में जुटे विभिन्न सामाजिक और बुद्धिजीवी संगठनों के माध्यम से होगी। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद केंद्रीय वार्ताकार खुद वरिष्ठ अलगाववादी नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। उनके ग्रीन सिग्नल के बाद केंद्र सरकार वार्ता का एलान करेगी।ट्रैक-2 पर प्रस्तावित वार्ता में केंद्र सरकार की तरफ से अधिकृत लोग हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों गुटों में शामिल सभी अलगाववादी संगठनों के प्रमुख नेताओं से मिलेंगे।

इसके अलावा जो अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के दायरे से बाहर हैं, उनसे भी बातचीत होगी। सूत्रों ने बताया कि ट्रैक-2 पर होने वाली बातचीत में कश्मीर कैदियों की रिहाई, अफस्पा, रमजान सीजफायर और एलओसी पर जंगबंदी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके अलावा जेलों में बंद नईम खान, शब्बीर शाह जैसे अलगाववादियों की रिहाई, कश्मीरी कैदियों को कश्मीर की जेलों में स्थानांतरित करने और कश्मीर समस्या के संभावित समाधानों के रोडमैप पर भी चर्चा होगी।

इन दलों के साथ सहमति बनाई जाएगी कि वह हुर्रियत  के संबंधित गुट को साफ शब्दों में कहेंगे कि केंद्र से वार्ता का न्योता आने पर हुíरयत की तरफ से कोई शर्त का जिक्र नहीं होगा। न हुर्रियत बातचीत लायक माहौल बनाने की बात करेगी। दूसरी ओर केंद्र भी कथित तौर पर कश्मीर मुद्दे पर बातचीत का न्योता देगा और इसमें संविधान के दायरे के भीतर या बाहर की बातचीत जैसे शब्दों का उल्लेख नहीं होगा।

सूत्रों ने बताया कि हुर्रियत  को बातचीत का न्योता देने से पहले केंद्र अलगाववादियों के विदेश दौरों को यकीनी बनाने के लिए पासपोर्ट भी जारी कर सकता है।सांकेतिक तौर पर उन इलाकों से कुछ शिविर भी हटाए जा सकते हैं, जहां दो वर्षो के दौरान नए शिविर बनाए गए हैं।

बातचीत के अलावा कोई विकल्प नहीं

कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ अहमद अली फैयाज के अनुसार, बातचीत के अलावा कोई दूसरा विकल्प किसी और के पास नहीं हैं। हुर्रियत बातचीत के लिए आगे आएगी, यह पाकिस्तान के रुख पर निर्भर करेगा। इस बात को केंद्र सरकार भी अच्छी तरह समझती है। इसलिए वह अगले एक दो माह तक कश्मीर में अपना ग्राउंड वर्क पूरा करते हुए हुíरयत को मेज की तरफ लाने का प्रयास करेगी। पाकिस्तान में नई सरकार के गठन का रास्ता साफ होने के साथ ही कश्मीर के प्रति उसके रुख का भी पता चल जाएगा। 

Posted By: Preeti jha

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