जम्मू, राज्य ब्यूरो : केंद्र सरकार की वैकल्पिक आयकर व्यवस्था एक अच्छा कदम है। इससे नौकरीपेशा लोगों को पारदर्शी तरीके से आयकर देने की सहूलियत मिल गई है। हालांकि, अन्य में अभी संशय बना हुआ है लेकिन आने वाले दिनों में उम्मीद है कि यह संशय दूर हो जाएगा। यही नहीं, इससे आयकर देने वालों की संख्या भी बढ़ेगी जो कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए सकारात्मक कदम होगा। यह बात जागरण विमर्श में इन्कम टैक्स वकील सचिन शर्मा ने कही।

शर्मा ने कहा कि भारत में तीन प्रकार के लोग रहते हैं। एक वर्ग अमीरों का है। उन्हें नई कर व्यवस्था का कोई भी फर्क नहीं पड़ता। चंद हजार रुपये कम और ज्यादा होने पर यह वर्ग ध्यान नहीं देता। एक वर्ग वह है जो कि गरीब हैं या फिर गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं। यह कर के दायरे के बाहर हैं और उन्हें भी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है। इस नई कर व्यवस्था का प्रभाव तीसरे वर्ग पर पड़ रहा है। यह मध्यम वर्ग है। यह वर्ग भी दो हिस्सों में बंटा हुआ है। एक वह है जो कि चंद रुपये बचाकर अपने बच्चों के लिए निवेश करना चाहते हैं, जबकि दूसरा वर्ग कुछ भी नहीं बचाना चाहता। इनके लिए नई कर व्यवस्था अहम है। पुरानी व्यवस्था में ढाई लाख रुपयों तक कोई भी टैक्स नहीं है जबकि ढाई से पांच लाख के बीच पांच प्रतिशत टैक्स है।

नई कर व्यवस्था में कई छूट खत्म कर दी गई हैं। इसमें सरकार ने नौकरीपेशा लोगों को तो यह विकल्प दिया है कि वह अगर एक बार नई कर व्यवस्था अपना लेते हैं तो भी दूसरी बार पुरानी व्यवस्था पर वापस आ सकते हैं, लेकिन अन्य वर्ग अगर नई कर व्यवस्था को एक बार अपना लेते हैं तो उनके लिए फिर पुरानी व्यवस्था में वापस लौटना संभव नहीं होगा। इसी से असमंजस बना हुआ है। अब करदाताओं को चाहिए कि वे दोनों का पहले हिसाब बनाएं और उसी के अनुसार दोनों में से एक को अपना लें। उन्होंने कहा कि अगर आपकी आय 15 लाख के आसपास है और कोई भी निवेश नहीं करते हैं तो नई कर व्यवस्था में जाना अधिक लाभदायक है।

क्या सरकार नई व्यवस्था से पहले मिलने वाली सभी छूट को खत्म करने जा रही है?

अभी इस बारे में कुछ स्पष्ट तो नहीं है, लेकिन जिस प्रकार से नई कर व्यवस्था में छूट खत्म करने के प्रावधान हैं, उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि आने वाले दिनों में सरकार ऐसा करे। टैक्स की स्लैब को आसान बना दे और छूट की सीमा को ऐसे ही बढ़ा दे।

नई कर व्यवस्था का क्या असर पड़ेगा?

सरकार ने पहले कारपोरेट सेक्टर को टैक्स में छूट दे रखी थी। मध्यम वर्ग का सरकार पर काफी दबाव था। इसी को देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। यह मध्यम वर्ग को खुश करने का एक कदम भी है।

नई कर व्यवस्था से व्यापारियों को कितना लाभ मिलेगा?

अभी यह कह पाना मुश्किल है। व्यपारियों में इसे लेकर असमंजस बना हुआ है। अगर वह नई व्यवस्था में जाते हैं तो पुरानी में लौटना असंभव है। ऐसे में अभी वे नई व्यवस्था को लेकर सामने नहीं आ रहे हैं। सरकार को इस पर स्पष्ट करने की जरूरत है।

टीडीएस वापसी को क्या करें?

टीडीएस हो या फिर अन्य कोई भी टैक्स। इसे वापस लेने के लिए सबसे बेहतर तरीका है कि आप इन्कम टैक्स रिटर्न भरें। इससे आपका टीडीएस वापस मिल जाएगा और अगर आपका टैक्स अधिक कटा है तो वह भी वापस मिल जाएगा।

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