जम्मू, जेएनएन। जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर बने फर्जी गन लाइसेस मामले के संबंध में जांच कर रही सीबीआइ ने सोमवार को श्रीनगर, जम्मू, गुरुग्राम और नोएडा में विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी शुरू हुर्इ।

सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कुपवाड़ा, बारमूला, ऊधमपुर, किश्तवाड़, शौपियां, राजौरी, डोडा और पुलवामा के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर के विभिन्न रिहायशी ठिकानों पर छापेमारी की गई जो अभी भी 13 विभिन्न ठिकानों पर जारी है ।यह पहला कोर्इ मौका नहीं है। इससे पहले भी समय-समय पर सीबाआर्इ ने छापेमारी की थी। राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने वर्ष 2017 में फर्जी गन लाइसेंस का पर्दाफाश किया था। इसमें जम्मू-कश्मीर में तैनात कुछ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) अधिकारियों की मिलीभगत होने की बात भी सामने आई थी। एटीएस ने जम्मू कश्मीर में तैनात एक वरिष्ठ आइएएस अधिकारी के भाई को भी गिरफ्तार किया था। उस पर आरोप है कि उसने राजस्थान में गन विक्रेताओं से चालीस लाख रुपये लेकर जम्मू कश्मीर से लाइसेंस बनवाए थे। राजस्थान पुलिस के आग्रह पर जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल ने मामले की जांच पिछले वर्ष सितंबर में सीबीआइ को सौंप दी थी। सीबीआइ की चंडीगढ़ शाखा ने मामले में एफआइआर दर्ज की थी।

सीबीआइ के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी तक की उनकी जांच के दौरान पाया गया कि वर्ष 2014 से 2018 तक जम्मू कश्मीर के सात जिलों डोडा, राजौरी, पुंछ, रियासी, रामबन, ऊधमपुर और कुपवाड़ा में फर्जी गन लाइसेंस बने हैं, जिनमें वरिष्ठ अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है।

ऑल जेएंडके आ‌र्म्स डीलर एसोसिएशन के प्रधान मक्खन लाल ने बताया कि गन विक्रेता सीबीआइ को मामले की जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं। जब किसी भी जिले का कोई ग्राहक उनके पास गन लाइसेंस लेकर आता है तो लाइसेंस के आधार पर ही उन्हें हथियार बेचते हैं। हथियार बेचने की जानकारी गृह विभाग को भी दी जाती है।

Posted By: Rahul Sharma

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