अवधेश चौहान, अंतरराष्ट्रीय सीमा सुचेतगढ़। अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बसे लाखों लोगों को ¨चता सता रही कि अगर हालात बिगड़ गए तो परिवार की सुरक्षा कैसे कर पाएंगे? सीमा पर बंकर तो हैं, लेकिन घरों से काफी दूर बनाए गए हैं। कई बार तो गोलाबारी के बीच भागना भी खतरे से खाली नहीं होता। पता नहीं कहां पर सीमा पार से गोला गिर जाए। गनीमत इसमें होती है कि घर के किसी कोने में जगह मिल जाए तो खुद को छुपा लो।

जम्मू कश्मीर सीमा पर पर करीब 14 लाख बंकर बनाएं जा रहे हैं। पाक गोलाबारी से बचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बसे 300 गांवों में करीब दो हजार बंकर बनकर तैयार हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई बंकरों में तो पानी भरा हुआ है, तो कुछ में अंडरग्राउंड होने के कारण सीलन होने से वहां ठंड काफी है। जीरो लाइन पर बसे गांव सुचेतगढ़ में रहने वाले बाबू राम का कहना है कि उन्होंनें अपनी जमीन दी और घर पर ही बंकर बना है। बंकर के निर्माण साधारण दीवारों की तरह नहीं होता। इसकी दीवारें और छत आम दीवारों से तीन गुना मोटी होती हैं। इसमें दस गुना सरिया अधिक डाला जाता है, ताकि गोलाबारी में बंकर की दीवारों को गोला नुकसान न पहुंचा सके।

गांव के ही तीर्थ राम का कहना है कि गांव में दो सामुदायिक बंकर बने हैं, लेकिन जिसकी क्षमता 40 लोगों की है। कुछ घरों से दूर होने के कारण लोग गोलाबारी की सूरत में नही पंहुच पाते। अभी हालांकि गोलाबारी नही हो रही है, लेकिन यह बंकर उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं। कोराटाना बस्ती गांव के राम लाल का कहना है कि सरकार की योजना है कि जो लोग उन्हें घर में जमीन देंगे तो सरकार उनके घर में परिवार के लिए बंकर बना देगी। घरों के लिए बंकरों के लिए ढाई लाख और सामुदायिक बंकरों के लिए पांच लाख निर्माण के लिए सरकार देती है।

परिवार की सुरक्षा के लिए 160 वर्ग फुट में बंकर बनाए जा रहे हैं, जिसकी श्रमता 8 से 10 सदस्यों के लिए है। राज्य की अंतरर्राष्ट्रीय और नियंत्रण रेखा पर करीब 14 हजार बंकर बनने है। जिन पर 415.73 रुपये की लागत आनी है। इन बंकरों का निर्माण नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी एनबीसीसी कर रही है।

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