'राज्य के दर्जे के बिना काम नहीं तो सत्ता में क्यों'? CM उमर पर BJP का हमला, विधानसभा में हर वादे का देना होगा हिसाब
जम्मू-कश्मीर में आगामी विधानसभा सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां भाजपा ने उमर अब्दुल्ला सरकार को चुनावी वादों और शासन व्यवस्था पर घेरा है।
-1789839151620_m.webp)
CM उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो
HighLights
भाजपा ने उमर अब्दुल्ला सरकार को चुनावी वादों पर घेरा।
सुनील शर्मा ने बुनियादी मुद्दों पर सरकार को घेरा।
आगामी विधानसभा सत्र में तीखी बहस के आसार हैं।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के आगामी सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विपक्षी भाजपा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार को चुनावी वादों, शासन व्यवस्था और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर घेरने की तैयारी शुरू कर दी है।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया है कि यदि पानी, बिजली, सड़क, स्कूल, अस्पताल और रोजगार जैसे बुनियादी कामों के लिए भी सरकार अधिकारों की कमी का हवाला देती है, तो फिर सरकार में बैठने का मतलब क्या है?
श्रीनगर में आयोजित एक जनसंवाद कार्यक्रम में शर्मा ने आरोप लगाया कि जनता अपनी रोजमर्रा की समस्याओं को लेकर सरकार के पास पहुंच रही है, लेकिन कई मामलों में उसे यह जवाब सुनने को मिलता है कि सरकार के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं।
उन्होंने सवाल किया कि पानी की पाइपलाइन जोड़ने, बिजली के पोल और तार लगाने, स्कूलों में स्टाफ की नियुक्ति, अस्पतालों में डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मियों की व्यवस्था अथवा सड़कों के गड्ढे भरने जैसे कामों के लिए क्या राज्य का दर्जा जरूरी है?
जनता का ध्यान भटकाने का आरोप
शर्मा ने कहा कि चुनी हुई सरकार को लगभग दो साल हो चुके हैं और ऐसे में जनता के सामने शासन की कार्यप्रणाली तथा समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्टता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार पर स्टेटहुड के मुद्दे के जरिए रोजमर्रा के प्रशासनिक सवालों से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। हालांकि, राज्य का दर्जा बहाल करना जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है और सत्ता पक्ष इसे महत्वपूर्ण राजनीतिक मांग के रूप में उठाता रहा है।
भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी विधानसभा सत्र में वह सरकार से जनता से किए गए प्रत्येक वादे पर जवाब मांगेगी। पार्टी का कहना है कि चुनाव के दौरान की गई प्रतिबद्धताओं की प्रगति, उनके क्रियान्वयन की स्थिति और सरकार के अब तक के कामकाज को सदन के भीतर स्पष्ट किया जाना चाहिए। विपक्ष बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और भर्ती जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।
पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत दोबारा लाया जाएगा
रोजगार के मुद्दे पर भी शर्मा ने सरकार को घेरा। उन्होंने 19 से 29 वर्ष के युवाओं की आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख करते हुए रोजगार के अवसरों पर सरकार से जवाब मांगने के संकेत दिए। आउटसोर्सिंग को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया और करीब 25 हजार पदों को आउटसोर्स किए जाने का दावा करते हुए पूछा कि क्या इन पदों को पारदर्शी और मेरिट आधारित भर्ती प्रक्रिया के तहत दोबारा लाया जाएगा।
शर्मा ने सरकार पर सत्ता और विपक्ष, दोनों की भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया। वहीं, भाजपा का कहना है कि विधानसभा सत्र जनता के मुद्दों पर सरकार की जवाबदेही तय करने का महत्वपूर्ण मंच होगा।
अब सत्र से पहले जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्टेटहुड और रोजमर्रा के शासन का मुद्दा आमने-सामने है। सरकार जहां अपने अधिकारों और राज्य के दर्जे से जुड़े सवालों को महत्वपूर्ण मानती है, वहीं भाजपा बुनियादी सेवाओं और चुनावी वादों पर तत्काल जवाबदेही की मांग कर रही है। आगामी सत्र में इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
