किश्तवाड़, बलबीर सिंह जम्वाल। वारदात को अंजाम देने से पूर्व हत्यारों ने परिहार बंधुओं को संभलने तक का मौका नहीं दिया। रात को दुकान बंद कर घर जाते समय अचानक सामने काली पोशाक में आए दो हथियारबंदों ने हैंडस अप कहा और दोनों के सिर में गोली मार दी। पूरी घटना को अनिल परिहार के नौकर ने अपनी आंखों से देखा।

पुलिस के विशेष जांच दल (सिट) ने पूछताछ के लिए अनिल परिहार के दोनों निजी सुरक्षाकर्मियों के अलावा उनके नौकर को हिरासत में लिया है। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि दुकान के मालिक अनिल परिहार थे। उनके बड़े भाई अजीत एसएफसी में कार्यरत थे। अनिल राजनीति में सक्रिय होने के कारण दिनभर बाहर रहते थे। पीछे उनके भाई अजीत दुकान को संभालते। सर्दी हो या गर्मी शाम को अनिल दुकान पर लौटने के बाद दिनभर के व्यापार पर चर्चा करते और हिसाब-किताब करने के बाद रात को साढ़े आठ बजे दुकान बंद कर घर लौटते। चूंकि घर की गली में कार नहीं जाती। इसलिए वह कार को पुराने डीसी दफ्तर के पास पार्क कर पैदल घर जाते थे।

उनके नौकर अनिल ने पुलिस को बताया कि वीरवार रात दोनों भाई दुकान बंद करने के बाद घर के लिए निकले। डीसी दफ्तर के पास कार पार्क कर दोनों पैदल घर जा रहे थे। पीछे वह भी कार से सामान और बैग लेकर थोड़ी दूरी पर पीछे चल रहा था। अभी वह थोड़ी दूर गली में पहुंचे, जहां रोशनी बेहद कम थी। अचानक काली पोशाक पहने दो हथियारबंद उनके सामने आए। दोनों पर हथियार तान कर हैंड्स अप कहा। दोनों ने अपने हाथ ऊपर उठाए थे कि कातिलों ने सिर में गोलियां दाग दीं। इसके बाद दोनों जिस दिशा से आए थे, भाग गए।  जिस जगह यह घटना घटी वहां सभी घर मुस्लिम समुदाय के हैं। उन्हीं लोगों ने दोनों भाइयों को जिला अस्पताल पहुंचाया। वे लोग भी अस्पताल में रहे परंतु माहौल तनावपूर्ण होने पर वे वहां से चले गए।

दोनों पीएसओ को शाम को भेज दिया था घर

प्रदेश भाजपा सचिव अनिल परिवार को दो निजी सुरक्षा कर्मी भी मिले थे। दोनों के स्थानीय होने के कारण अनिल रोज शाम को दुकान बंद करने से पहले घर भेज देते। दोनों सुबह उनके पास पहुंच जाते। घटना वाले दिन भी अनिल ने दुकान बंद करने से आधा घंटा पहले दोनों को घर भेज दिया था। पुलिस दोनों निजी सुरक्षा कर्मियों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

हत्याओं के बाद पंचायत चुनाव की सुरक्षा चुनौती

किश्तवाड़ में भाजपा नेता व उसके भाई की हत्या के बाद उपजे हालात में पंचायत चुनाव की सुरक्षा बड़ी चुनौती साबित होंगे। आतंकवादियों ने लोगों को धमकियां दी थी कि स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव से दूर रहें। चुनाव से ठीक पहले इन राजनीतिक हत्याओं को पंचायत चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है। पूर्व पंच-सरपंचों के संगठन जम्मू-कश्मीर पंचायत कांफ्रेंस ने भी चुनाव लड़ने की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध करने का मुद्दा उठाया था। अनिल परिहार भी इन दिनों जिले में पंचायत चुनाव की तैयारियों को तेजी देने में सक्रिय थे। जिले के कुछ हिस्सों में 17 नवंबर को पहले चरण में मतदान होना है। यह तय है कि चुनाव में बाधाएं पैदा करने के लिए आतंकियों की साजिशें जारी हैं।

आतंकवाद को बढ़ाने के लिए हुई नई भर्ती

इसके पुख्ता संकेत हैं कि किश्तवाड़ में आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए नई भर्ती हुई है। परिहार बंधुओं पर हमले करने वाले भी नए भर्ती हुए थे। पंचायत चुनाव की सुरक्षा सुनिश्चित करना आसान काम नहीं है। इस समय चुनाव की सुरक्षा के लिए चालीस हजार सुरक्षा कर्मी तैनात हैं जबकि इतने ही लोग पंच, सरपंच बनने के लिए चुनाव मैदान में हैं। ऐसे हालात में सुरक्षा कर्मियों के लिए संभव नही है कि वे हर उम्मीदवारों को सुरक्षा दे सकें। उनकी प्राथमिकता चुनाव के लिए सुरक्षित माहौल बनाना है। वहीं पंचायत कांफ्रेंस के प्रधान अनिल शर्मा का कहना है कि पंचायत चुनाव में सुरक्षा अहम मुद्दा रहेगा। इसके संकेत भाजपा नेता व उसके भाई की हत्या से मिल गया है। पिछली बार भी पंचायत चुनाव के दौरान 12 लोगों की आतंकवादियों ने हत्या की थी। सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध होना जरूरी है ताकि चुनाव मैदान में उतरे ग्रामीण बिना भय के लोगों के बीच जा सकें। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि आतंकी ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत बनाने की प्रक्रिया में बाधा डालना चाहते हैं। निकाय चुनाव कामयाब होने के बाद आतंकियों पर गतिविधियां तेज करने का दबाव है। ऐसे में कोई बड़ी बात नहीं है कि भाजपा नेताओं की हत्याएं दशहत पैदा करने के लिए की गई हैं। 

Posted By: Rahul Sharma

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