जम्मू, जागरण संवाददाता : प्रभातफेरी के साथ पिछले सप्ताह आरंभ हुआ काल भैरव अष्टमी समारोह सोमवार को वार्षिक भंडारे के साथ संपन्न हो गया। सोमवार को पुराने शहर के चौक चबूतरा के निकट स्थित प्राचीन काल भैरव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना हुई। इसके बाद दोपहर को विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। वार्षिक भंडारे के दौरान श्रद्धालुओं व सेवादारों की ओर से चौक चबूतरा से लेकर अपर बाजार तक करीब डेढ़ दर्जन स्टाल लगाए गए थे, जहां राजमा-चावल के साथ विभिन्न प्रकार के व्यंजन परोसे गए।

शाम करीब पांच बजे तक क्षेत्र में भंडारा चला, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। काल भैरव अष्टमी को लेकर सप्ताह पूर्व ही पूरे बाजार को दुल्हन की तरह सजा दिया गया था। चौक चबूतरा से लेकर अपर बाजार तक पूरे क्षेत्र को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था। बाजार की सजावट के लिए दूसरे राज्यों से कलाकार विशेष रूप से पहुंचे थे जिन्होंने काल भैरव का मंदिर व पूरे बाजार की सजावट की। शाम को मंदिर व आसपास के क्षेत्र को रोशन करने के लिए पूरे क्षेत्र में रंग-बिरंगी लाइटें भी लगाई गई थीं। दिशाओं के रक्षक हैं भैरव जी मंदिर के महंत रुमिल शर्मा ने इस मौके पर कहा कि ¨हदू देवताओं में भैरव जी का बहुत ही महत्व है। यह दिशाओं के रक्षक और काशी के संरक्षक कहे जाते हैं।

कहते हैं कि भगवान शिव से ही भैरव जी की उत्पत्ति हुई। यह कई रूपों में विराजमान हैं बटुक भैरव और काल भैरव यही हैं। इन्हें रुद्र भैरव, क्रोध भैरव, उन्मत्त भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव, असितांग भैरव, चंड भैरव, रुद्र भैरव संहार भैरव और भैरवनाथ भी कहा जाता है। नाथ संप्रदाय में इनकी पूजा का विशेष महत्व रहा है। भैरव आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होती है। व्यक्ति में साहस का संचार होता है। इनकी आराधना से ही शनि का प्रकोप शांत होता है। रुमिल शर्मा ने कहा कि इस साल भी कोरोना महामारी के चलते सीमित रूप से काल भैरव अष्टमी मनाई गई है। भैरव बाबा के आशीर्वाद से अगले साल हालात ठीक होने पर व्यापक स्तर पर अष्टमी मनाई जाएगी।