जम्मू, जेएनएन। कुर्बानी व आस्था का प्रतीक ईद-उल-अजहा (बकरीद) जम्मू में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बकरीद की नमाज अताकर अमन चैन की कामना की। हालांकि इस दौरान शहर की सभी मस्जिदों जहां ईद की नमाज अदा की जानी थी, वहां सुरक्षा के कडे़ प्रबंध रहे। नमाज अदा होने तक शहर की कंटीली तारों से बंद रखा गया था ताकि कोई भी अप्रिय घटना न हो। अनुच्छेद 370 के बाद यह पहला त्यौहार था। मुख्य नमाज ईदगाह मैदान में हुई जहां सैकड़ों लोगों ने सामूहिक रूप से नमाज अदा की।

इस बीच, जम्मू-कश्मीर सरकार के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और प्रवक्ता रोहित कंसल ने कहा, 'रविवार को लोग खरीददारी के लिए घर से बाहर निकले। कुछ लोग श्रीनगर जाना चाहते हैं। हम ऐसे लोगों को श्रीनगर जाने की सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहे हैं। पाबंदी के बावजूद लोगों को छूट दी जा रही है। इस संबंध में पुलिस ने भी स्पष्ट किया है। मैं सभी को ईद की शुभकामनाएं देता हूं।

जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव (योजना आयोग) रोहित कंसल ने बताया, 'जम्मू के ईदगाह में 5000 से अधिक लोगों ने नमाज अदा की। हमे बारामूला, रामबन, अनंतनाग, शोपियां, अवंतीपोरा, श्रीनगर और कश्मीर घाटी में अन्य स्थानों से ईद की नमाज के सफल समापन की रिपोर्ट मिली है।'

इस मौके पर डिवीजनल कमिश्नर संजीव वार्मा, डीसी जम्मू सुषमा चौहान, आईजी जम्मू एमके सिन्हा, एसएसपी जम्मू तेजेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी व नेता ईदगाह मैदान के बाहर मुस्लिम भाइयों को मुबारकबाद देने के लिए मौजूद थे। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर बकरीद की मुबारकबाद दी और उसके बाद पारंपरिक रूप से अपने-अपने घरों में कुर्बानी दी।

सुबह से ही लोगों के चेहरों में पर्व का उल्लास देखने को मिला। मुस्लिम समुदाय के लोग खासकर बच्चे सुबह नए-नए कपड़े पहनकर ईदगाह पहुंचे। सुबह के 8 बजे ईदगाह मैदान में मौलाना ने बकरीद की नमाज पढ़ी। उन्होंने देश व जम्मू-कश्मीर की तरक्की, खुशहाली व अमन-चैन की दुआ के साथ नमाज अदा कराई।

मौलाना ने संदेश देते हुए कहा कि इस्लाम भाई-चारे का संदेश देता है। आपसी प्रेमभाव से मानवता की सेवा करना हर मुसलमान का कर्तव्य है। उन्होंने त्याग और कुर्बानी के महत्व को बताते हुए कहा कि मुस्लिम धर्म में त्याग का बहुत महत्व है। इस्लाम अल्लाह के वास्ते अपना सब कुछ त्याग करना सिखाता है।

महिलाओं के लिए नमाज अता करने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी। वहीं शिया समुदाय ने करबला मैदान में नमाज अता की। इसके बाद जामा मस्जिद तालाब खटिका, उस्ताद मुहल्ला, वजारत रोड स्थित जैनबिया हॉल में भी नमाज पढ़ने वालों की भीड़ रही। दुआ कबूल होने के बाद हर तरफ ईद मुबारक का स्वर सुनाई दे रहा था। इस अवसर पर सुरक्षा के प्रबंख पुख्ता किए गए थे।

नमाज पढ़ने के बाद घरों में कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ। भेड़-बकरों की कुर्बानी के बाद गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा गया। पहला हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा हिस्सा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों के लिए रखा गया। कई मुस्लिम परिवारों ने बकरीद के मौके पर दावत का भी इंतजाम किया है। 

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Posted By: Rahul Sharma

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