जम्मू: बाहुफोर्ट का जाम होगा खत्म! पक्का तालाब-हाईवे लिंक रोड परियोजना पर फिर जोर, इन इलाकों के लोगों को फायदा
बाहुफोर्ट क्षेत्र में बढ़ते यातायात दबाव और नवरात्रों में जाम की समस्या से निपटने के लिए पक्का तालाब-हाईवे लिंक रोड ...और पढ़ें

नवरात्रों में जाम से निपटने के लिए पक्का तालाब-हाईवे लिंक रोड की मांग फिर उठी है।
HighLights
पक्का तालाब-हाईवे लिंक रोड की मांग फिर गरमाई।
बाहुफोर्ट में नवरात्रों और पर्वों पर जाम से मिलेगी राहत।
सरकारी भूमि से सड़क बनने पर हजारों नागरिकों को लाभ।
जागरण संवाददाता, जम्मू। ऐतिहासिक बाहुफोर्ट क्षेत्र में बढ़ते यातायात के दबाव और नवरात्र जैसे बड़े पर्वों के दौरान पैदा होने वाली अव्यवस्था से निपटने के लिए पक्का तालाब-हाईवे लिंक रोड का मुद्दा फिर गरमा गया है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पक्का तालाब से वन विभाग डिपो के समीप सरकारी भूमि होते हुए हाईवे तक प्रस्तावित सीधी सड़क के निर्माण की मांग उठाई है।
यह संपर्क मार्ग तैयार होने से प्रतिदिन हजारों लोगों को सीधे राहत मिलेगी और मंदिर मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम पर स्थायी लगाम लग सकेगी।
एक ही संकरी सड़क पर निर्भर बाहुफोर्ट
बाहुफोर्ट डेवलपमेंट कमेटी के प्रधान एवं भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष राजीव चाढ़क का कहना है कि महाशा मुहल्ले से शुरू होकर नरवाल पुल के नजदीक बीच से सड़क बनाने का प्रस्ताव था। भविष्य में ध्यान में रखते हुए यह बहुत जरूरी है। फिलहाल बाहुफोर्ट के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है।
लिहाजा इस पर बिना देरी सरकार को ध्यान देना चाहिए। वहीं पूर्व कारपाेरेटर शारदा देवी भी इसे जनहित का मुद्दा करार दे रही हैं। उनका कहना है कि वैकल्पिक मार्ग समय की जरूरत है। गरीब लोगों को नुकसान नहीं होना चाहिए। फिलहाल एक ही सड़क बाहुफोर्ट को जोड़ती है जो कम चौड़ी भी है।
क्यों जरूरी है यह वैकल्पिक मार्ग?
बावे माता मंदिर में श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या और केबल कार परियोजना के विस्तार के चलते इस ऐतिहासिक क्षेत्र पर यातायात का बोझ कई गुना बढ़ चुका है। त्योहारों और सप्ताह के अंत पर स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि स्थानीय बस्तियों की दैनिक आवाजाही बाधित हो जाती है।
इसके बनने से पक्का तालाब, कच्चा तालाब, महाशा मुहल्ला और शाहबाद कालोनी के हजारों नागरिकों को मुख्य मंदिर मार्ग के जाम में फंसे बिना सीधे हाईवे पर पहुंचने का सुगम रास्ता मिलेगा। आपातकालीन स्थितियों जैसे एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड की आवाजाही के दौरान मुख्य मार्ग पर भीड़ का दबाव कम होगा, जिससे भगदड़ या अव्यवस्था का जोखिम समाप्त होगा तथा श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
प्रस्तावित सड़क वन विभाग के डिपो और सरकारी भूमि के हिस्से से होकर सीधी हाईवे से जुड़ती है, जिससे जमीन अधिग्रहण की कोई बड़ी तकनीकी अड़चन भी सामने नहीं आती।
नवरात्रों में कैद जैसे हालात से मिलेगी मुक्ति
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवरात्रों और प्रमुख पर्वों के दौरान इलाके में वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध या अत्यधिक भीड़ के कारण स्थानीय नागरिकों का अपने ही घरों से बाहर निकलना दूभर हो जाता है। यदि यह लिंक रोड बनकर तैयार हो जाती है, तो क्षेत्रवासियों को मंदिर वाले मुख्य मार्ग पर जाने की विवशता से मुक्ति मिल जाएगी।
अलबत्ता यह भी ध्यान रखा जाए कि यहां गरीब लोग रहते हैं। उनका नुकसान भी नहीं होना चाहिए। लोगाें ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य की पर्यटन और धार्मिक भीड़ की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ठंडे बस्ते में पड़ी इस जनहितैषी योजना को तत्काल प्रभाव से धरातल पर उतारा जाए।
