जम्मू, जेएनएन। आसाराम को एक नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी करार देते हुए बुधवार को जोधपुर सेंट्रल जेल परिसर में फैसला सुनाया गया। आसाराम के आश्रम भगवती नगर में सुबह से ही उनकी रिहाई के लिए प्रार्थना कर रहे उनके अनुयायी आंसू छलकने से खुद को नहीं रोक सके। सभी ने कहा कि न्याय के लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। आसाराम उन्हें हमेशा हिम्मत बनाए रखने के लिए प्रेरित करते रहे हैं। अब उन्हें हाई कोर्ट से ही न्याय की उम्मीद है। 

सुबह से ही उनके अनुयायी आश्रम पहुंचने लगे थे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उसी पंडाल में पूजा अर्चना शुरू कर दी, जहां आसाराम कई बार प्रवचन दे चुके हैं। श्रद्धालुओं ने जप, ध्यान और कीर्तन किया। जब तक फैसला नहीं आया श्रद्धालु उनकी रिहाई के लिए प्रार्थना करते रहे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि आसाराम रिहा हो जाएंगे, लेकिन फैसला आने के बाद आश्रम में खामोशी छा गई। कोई किसी के साथ बात करने को तैयार नहीं था। फैसले को देखते हुए पहले से ही सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था की गई थी। वैसे आश्रम में श्रद्धालुओं ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया, जिससे कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ती। भगवती नगर आश्रम के प्रबंधक राम सुख दास ने कहा सच्चाई कि हमेशा जीत हुई है। बुधवार का फैसला अंतिम नहीं है। आसाराम के न्याय के लिए अभी हाई कोर्ट में अपील होगी। संगत को शुरू से ही शांति बनाए रखने के लिए कहा गया है। श्रद्धालुओं को यकीन है कि जीत हमेशा न्याय की होती है।

मामले में कब, क्या हुआ

- 15 अगस्त, 2013 को जोधपुर के मणाई आश्रम की अपनी कुटिया में आसाराम ने 16 वर्षीय नाबालिग पीड़िता के साथ एक घंटे तक यौन उत्पीड़न किया।

- 19 अगस्त, 2013 को पीड़िता और उसके माता-पिता ने नई दिल्ली के कमला नगर पुलिस थाने में देर रात करीब 12 बजे आसाराम के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत की। इस पर रात 1 बजे पुलिस ने पीड़िता का मेड़िकल कराया और रात 2:45 बजे मामला दर्ज किया।

- 20 अगस्त, 2013 को पीड़िता के 164 के बयान कराए गए और जीरो नंबर की एफआईआर दर्ज कर केस जोधपुर ट्रांसफर कर दिया।

- 21अगस्त, 2013 को जोधपुर पुलिस ने शाम 6 बजे आसाराम के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 342,376,354 (ए ), 506,509 और 134,पोक्सो एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

- करीब एक सप्ताह तक पुलिस ने मामले की जांच की और आसाराम को बयान के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आया।

- 27 अगस्त पुलिस ने इमीग्रेशन सेंटर को लुकआउट सर्कुलर जारी कर आसाराम के देश से बाहर जाने पर रोक लगाई।

- 31 अगस्त, 2013 की देर रात 1 बजे जोधपुर पुलिस की टीम ने आसाराम को इंदौर के आश्रम से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस आसाराम को लेकर जोधपुर पहुंची।

- 1 सितंबर को पुलिस ने आसाराम को जोधपुर सेशन कोर्ट में पेश किया,जहां से एक दिन का रिमांड जारी किया गया।

- 2 सितंबर को पुलिस जांच में साजिश व यौन दुराचार की पुष्टि । कोर्ट ने आसाराम को जेल भेजा।

- 4 सितंबर, 2013 को आसाराम की ओर से सेशन कोर्ट में जमानत की याचिका दायर की, जो 5 सितंबर को खारिज कर दी गई।

- 16 सितंबर,2013 को आसाराम की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया।

- 10 अक्टूबर,2013 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए जमानत याचिका दायर की गई, लेकिन कोई ने जमानत देने से इंकार कर दिया।

- 6 नवंबर,2013 को पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया,जिस पर 29 नवम्बर को कोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया। पुलिस ने 1012 पेज की चार्जशीट कोर्ट में पेश की। इसमें 121 दस्तावेज और 58 गवाहों के बयान संलग्न किए गए।

- 10 फरवरी, 2014 को हाईकोर्ट ने आसाराम की ओर से लगाई गई जमानत याचिका फिर खारिज कर दी।

- 14 फरवरी, 2014 को कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी आसाराम और सह आरोपी शिवा, शिल्पी, शरद, प्रकाश के खिलाफ आरोप तय किए गए।

- 19 मार्च, 2014 से 6 अगस्त 2016 तक अभियान पक्ष ने अपनी तरफ से 44 गवाहों की गवाही कराई। इसके साथ ही 160 दस्तावेज पेश किए।

- 4 अक्टूबर,2014 को आसाराम के मुल्जिम बयान दर्ज किए गए।

- 22 नवंबर, 2016 से 11 अक्टूबर, 2017 तक बचाव पक्ष ने 31 गवाह के बयान दर्ज कराने के साथ ही 225 दस्तावेज कोर्ट में पेश किए।

- 30 जनवरी, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल ग्राउंड पर दायर की गई जमानत याचिका भी खारिज की दी।

सुप्रीम कोर्ट में 3 बार जमानत याचिकाएं दाखिल की गई, लेकिन हर बार खारिज होती रही।

- करीब छह माह तक अंतिम बहस चलती रही। इस दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने अपने-अपने तर्क पेश किए।

- जोधपुर एससी,एसटी कोर्ट में 7 अप्रैल को बहस पूरी हो गई और कोर्ट ने फैसला 25 अप्रैल को सुनाने की बात कही।

- 25 अप्रैल को कोर्ट ने आसाराम को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। उसके साथ दो सह अभियुक्तों को भी सजा सुनाई गई।

- आसाराम 1696 दिन से जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद है ।

नोट- जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद आसाराम ने 4 साल 7 महीने में 6 बार सेशन कोर्ट, 3 बार हाईकोर्ट और 3 बार सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की, लेकिन हमेशा खारिज होती रही।  

Posted By: Babita