जम्मू, जागरण संवाददाता : कला संस्कृति के संरक्षण के बडे़-बडे़ दावे करने वाली सरकार कोरोना से उत्पन्न संकट के बीच कलाकारों की मदद करना तो दूर उनका पिछला कई वर्षो का भुगतान करना भी भूल चुकी है। सैकडों कलाकार इन दिनों कोई कार्यक्रम न मिलने के कारण भुखमरी की कगार पर हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।

हालत यह है कि कोराेना की पहली लहर थमते ही पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अकादमी की मदद से जो कार्यक्रम करवाए उनका भुगतान भी कलाकारों को नहीं हुआ है। जबकि पर्यटन विभाग सारी पेमेंट जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी को दे चुका है। पर्यटन विभाग से पैसा मिल जाने के बावजूद कलाकारों का मानदेय उन्हें क्यों नहीं मिल रहा। इसका अकादमी के पास कोई जवाब नहीं है।

संघर्ष के इस दाैर में कलाकार अकादमी में हर दूसरे दिन अपनी पेमेंट के लिए चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें हर दिन टाल दिया जाता है। कलाकारों की दयनीय स्थितियों के बावजूद उन्हें अपने काम के पैसे न मिलना दुखद है। एक तरफ तो सरकार कई तरह के पैकेज घोषित कर कोरोना पीडितों की मदद कर रही है तो दूसरी तरफ कलाकारों को अपने किए काम के पैसे नहीं मिल रहे। इसके लिए मजबूर कलाकार प्रदर्शन तक कर चुके हैं ताकि उनकी आवाज उपराज्यपाल तक पहुंचे और उनका भुगतान हो जाए लेकिन अब तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया गया।

कोरियोग्राफर राकेश कुमार कोना ने कहा कि जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी ने उनका वर्ष 2017 के बाद से कोई भुगतान नहीं किया गया है। इतना ही नहीं पर्यटन विभाग के साथ भी उन्होंने जो कार्यक्रम किए हुए हैं। उसका पैसा भी अकादमी नहीं दे रही जबकि पर्यटन विभाग ने उनका भुगतान जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी को कर दिया हुआ है। उनके साथ काम करने वाले कलाकार पैसा न मिलने के कारण परेशान हैं लेकिन अकादमी के अधिकारी बात तक करने को तैयार नहीं हैं कि उनका भुगतान क्यों नहीं हो रहा।

कलाकार सीमा मेहरा ने कहा कि वह लंबे समय से अकादमी और पर्यटन विभाग के साथ काम करती आ रही हैं लेकिन यह पहली बार है कि पर्यटन विभाग ने तो भुगतान कर दिया हुआ लेकिन आगे अकादमी कलाकारों का भुगतान नहीं कर रही। कोरोना के काल में जबकि पहले से ही कलाकार काम न मिलने के कारण परेशान हैं तो अकादमी उनका पैसा रोक कर उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है।

कलाकार अशोक कुमार ने कहा कि कलाकारों का सदा शोषण ही होता है। कभी भी समय पर भुगतान नहीं होता। जब कोई मेला या समारोह करवाना होता है तो यही आयोजक कलाकारों के आगे पीछे चक्कर काट रहे होते हैं लेकिन कार्यक्रम की सफलता के बाद उन्हें पहचानने से भी इंकार कर देते हैं। इन दिनों कोरोना के चलते जब कलाकार पहले से ही परेशान हैं तो उनका सहयोग करने के बजाए उन्हें परेशान किया जा रहा है।

कलाकार अशोक अंजुम शर्मा का कहना है कि दूरदर्शन के कार्यक्रम बंद हैं। रेडियो में कुछ नहीं हो रहा। जम्मू-कश्मीर भाषा अकादमी पिछले भुगतान तक नहीं कर रही। नार्थ जोन कल्चरल सेंटर पटियाला, आइसीसीआर के कार्यक्रम नहीं हो रहे। दूसरे सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के भी कार्यक्रम नहीं हो रहे। आज कलाकारों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर वह करें तो क्या करें।

कलाकार राधिका मंहास ने कहा कि कलाकारों को खून पसीना एक कर कोई कार्यक्रम मिलता है और उसके बाद पेमेंट के लिए कई-कई चक्कर काटने पड़ते हैं। जब तक कलाकारों की इज्जत नहीं होगी।उनका सम्मान नहीं होगा तब तक हमारी कला संस्कृति का संरक्षण कैसे संभव है। आज कई लोक सांस्कृतिक पार्टियों ने गाना बजाना ही बंद कर दिया है। जिसके चलते कई लोक नाट्य शैलियां लुप्त होने की कगार पर हैं लेकिन यहां किसी को इस बात की कोई चिंता नहीं है। ऐसा लग रहा है जैसे साजिश के तहत हमारी संस्कृति को मिटाने के प्रयास हो रहे हों।

वहीं अतिरिक्त सचिव जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी संजीव राणा ने कहा कि कलाकारों के भुगतान की दिशा में काम शुरू हो चुका है। कोशिश है कि जल्द उनका भुगतान कर दिया जाए। कम से कम पर्यटन विभाग ने जो भुगतान किया हुआ है। वह पैसे तो जल्द कलाकारों को मिल ही जाएंगे।

 

Edited By: Rahul Sharma