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अरनिया में 50 लाख के जाली नोट रैकेट पर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, मुख्य कड़ी तरसेम की गिरफ्तारी से खुलेगा पूरा नेटवर्क

By Daljeet Singh Edited By: Rahul Sharma
Published: Tue, 28 Jul 2026 05:45 PM (IST)

अरनिया में 50 लाख रुपये के जाली भारतीय करेंसी नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियां चिंतित हैं। मुख्य आरोपी तरसेम और ...और पढ़ें

अरनिया जाली नोट रैकेट, 50 लाख के नेटवर्क का पर्दाफाश।

अरनिया जाली नोट रैकेट, 50 लाख के नेटवर्क का पर्दाफाश।

HighLights

  1. अरनिया में 50 लाख रुपये के जाली नोटों का नेटवर्क सक्रिय।

  2. मुख्य आरोपी तरसेम की गिरफ्तारी से खुलेगा पूरा राज।

  3. CDR जांच में दिल्ली-कश्मीर तक जुड़े नेटवर्क के तार।

संवाद सहयोगी, आरएसपुरा। अरनिया क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे जाली भारतीय करेंसी के बड़े नेटवर्क को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। सेना की सुरक्षा एजेंसी की ओर से पुख्ता खुफिया इनपुट और दो लोगों से पूछताछ में अहम खुलासों के बावजूद मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार मामला तब सामने आया जब सेना के इंटेलिजेंस विंग को अपने स्तर पर इनपुट मिला कि अरनिया में जाली नोटों का नेटवर्क काम कर रहा है। इनपुट की पुष्टि के बाद इसे जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ साझा किया गया। इसके आधार पर अरनिया पुलिस ने विलियम खोखर और रघुवीर को पूछताछ के लिए थाने बुलाया।

पूछताछ के दौरान दोनों ने कथित तौर पर इस नेटवर्क के मुख्य आरोपी तरसेम और उसके साथियों रवि और संजीव के नाम लिए। सूत्रों का दावा है कि तीनों फिलहाल फरार हैं और पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।

जांच में सामने आया है कि क्षेत्र में करीब 50 लाख रुपये की जाली भारतीय करेंसी लाने की बात कही गई थी। लोगों को कम रकम के बदले ज्यादा मूल्य की नकली करेंसी देने का लालच देकर इस धंधे को फैलाया जा रहा था। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूछताछ के लिए बुलाए गए दोनों व्यक्तियों के पास से कोई जाली नोट या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें छोड़ दिया गया।

CDR से दिल्ली से कश्मीर तक जुड़े तार

इस केस की सबसे अहम कड़ी बनी है कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में बुलाए गए दोनों लोगों और फरार बताए जा रहे तीनों संदिग्धों की CDR में कई अहम सुराग मिले हैं। इनके संपर्क श्रीनगर, कश्मीर के अन्य क्षेत्रों, दिल्ली, बिहार और अन्य राज्यों तक लगातार रहे हैं। एजेंसियां अब पता लगा रही हैं कि ये संपर्क सामान्य थे या सीधे जाली करेंसी नेटवर्क से जुड़े थे।

जांच में एक विजयपुर कनेक्शन भी सामने आया है। बताया जा रहा है कि जाली करेंसी की स्कैनिंग या उससे जुड़े उपकरण के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन विजयपुर निवासी डेविड नामक व्यक्ति से लाई गई थी। अब इस व्यक्ति की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि सेना की इंटेलिजेंस विंग के अधिकारियों ने हाल ही में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर मामले को गंभीरता से लेने और जल्द प्रभावी कार्रवाई पर जोर दिया है। इसके बावजूद अभी तक न तो मुख्य आरोपी तरसेम, रवि और संजीव की गिरफ्तारी हो सकी है और न ही किसी विशेष जांच दल या अभियान के गठन की आधिकारिक जानकारी सामने आई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा एजेंसी से मिले इनपुट पर पूछताछ की गई थी, बरामदगी न होने पर छोड़ दिया गया और जांच जारी है।

फिलहाल जांच एजेंसियों का मानना है कि इस पूरे नेटवर्क की असली परतें मुख्य आरोपी तरसेम की गिरफ्तारी के बाद ही खुलेंगी। उसी से नकली नोटों के स्रोत, अंतरराज्यीय संपर्कों और विजयपुर कनेक्शन से जुड़े राज सामने आ सकते हैं।