जम्मू, राज्य ब्यूरो : सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी के नेतृत्व में कारगिल राइड पर निकले मोटरसाइकिल सवार चार दलों ने शुक्रवार को द्रास में पहुंचकर 22 साल पहले पाकिस्तान से लड़े गए कारगिल युद्ध के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी। ये दल ऊधमपुर, श्रीनगर, राजौरी जिले के नौशहरा और लेह से निकले थे। लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी कारगिल के हीरो हैं और उन्होंने इस युद्ध में वीर चक्र जीता था।

कारगिल विजय दिवस एवं स्वतंत्रता के 75वें साल के उपलक्ष्य में चार शहरों से निकले 75 मोटरसाइकिलों पर 91 सवारों के दल शुक्रवार को द्रास में इकट्ठे हो गए। द्रास में इन दलों का स्वागत सेना की 8 माउंटेन डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल नागेन्द्र सिंह ने किया।

द्रास पहुंचने के बाद शुक्रवार शाम को पत्रकारों से बातचीत करते आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने कहा कि लद्दाख में तैनाती से मुझे इस इलाके व लोगों से प्यार हो गया है। यहां के लोग सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहते हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि सेना लद्दाख की सुरक्षा के लिए हर बलिदान देने को तैयार रहेगी। कारगिल युद्ध में लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप में लड़कर वीर चक्र हासिल करने वाले जोशी ने आर्मी कमांडर बनने से पहले लद्दाख की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली सेना की 14 कोर की कमान भी संभाली है। उन्होंने लद्दाख में खासा समय बिताया है।

सेना की उत्तरी कमान मुख्यालय ऊधमपुर से लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी के नेतृत्व में 25 मोटरसाइकिल सवारों का दल वीरवार को रवाना हुआ था। इसी दौरान लेह, श्रीनगर और राजौरी जिले के नौशहरा से भी निकले मोटरसाइकिल सवार द्रास के लिए निकले। द्रास में ये सभी दल आर्मी कमांडर के नेतृत्व वाले दल के साथ मिल गए। इस धु्रव कारगिल राइड का आयोजन कारगिल के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के साथ युवाओं में देशभक्ति की भावना को बल देने के लिए किया गया था।

लेह के दल ने दो चरण किए पूरे: लेह से पहुंचे सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के 15 मोटरसाइकिल सवारों के दल ने पहले चरण में लेह से दौलत बेग ओल्डी और दूसरे चरण में लेह से द्रास तक का सफर तय किया है। इसके बाद द्रास वॉर मेमोरियल में सेना के शहीदों को श्रद्धासुमन अर्पित किए।  

Edited By: Rahul Sharma