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लद्दाख में भंग हुईं सभी LAHDC, क्या हैं ये परिषदें और कैसे होता है चुनाव?

Published: Thu, 22 Oct 2026 03:01 PM (IST)

लद्दाख प्रशासन ने कारगिल की एकमात्र शेष लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) को भंग कर दिया है जिससे केंद्रशासित ...और पढ़ें

लद्दाख में सभी LAHDC भंग (जागरण फोटो)

लद्दाख में सभी LAHDC भंग (जागरण फोटो)

HighLights

  1. आठ परिषदों के चुनाव का मार्ग प्रशस्त

  2. LAHDC स्थानीय स्वशासन हेतु 1995 में स्थापित निर्वाचित निकाय

  3. परिषद सदस्य सीधे चुने जाते, मुख्य कार्यकारी पार्षद का चुनाव करते

डिजिटल डेस्क, जम्मू। लद्दाख में प्रशासन ने बुधवार को केंद्रशासित प्रदेश में एकमात्र बची लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद, कारगिल (LAHDC) को भंग कर दिया है।

प्रशासन ने प्रशासनिक ढांचे के पुनर्गठन, नए जिलों के गठन और एलएएचडीसी करगिल प्रमुख पदाधिकारियों सहित 10 पार्षदों के इस्तीफे को निर्णय का आधार बनाया है। प्रशासन के इस कदम से लद्दाख में आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के चुनाव कराने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है। 

लद्दाख के लिए LAHDC क्यों जरूरी है, इसके सदस्य कैसे चुने जाते हैं और इनका काम क्या होता है। आइए, इस बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

LAHDC क्या होती हैं?

लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख में स्थानीय स्वशासन और विकास के लिए बनाई एक निर्वाचित वैधानिक संस्था होती है।

साल 1995 में LAHDC की स्थापना जमीनी स्तर पर लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने और स्थानीय विकास की योजनाएं बनाने के लिए की गई थी।

इसका मुख्य उद्देश्य संसाधनों का प्रबंधन करना और क्षेत्रीय मामलों में स्थानीय लोगों की भागेदारी को संवैधानिक रूप से सुनिश्चित करना था।

दो से आठ हुए जिले

साल 2019 में लद्दाख को तत्कालीन जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया। साल 2019 से पहले लद्दाख में दो परिषदें ही हुआ करती थीं। लेह (LAHDC) और कारगिल (LAHDC)।

साल 2026 यानी मौजूदा समय में लद्दाख एक केंद्रशासित प्रदेश है और इसमें आठ जिले हैं। हाल ही में उपराज्यपाल ने सांकू को आठवां जिला बनाया। इस तरह अब केंद्रशासित प्रदेश में आठ परिषदें हैं।

LAHDC के होंगे चुनाव

कारगिल परिषद को भंग करने का फैसला इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि उसका कार्यकाल अक्टूबर 2028 तक निर्धारित था। लेह स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद का कार्यकाल 30 अक्टूबर, 2025 को समाप्त हो चुका था।

अब क्योंकि सभी LAHDC भंग हो गई हैं इसलिए लद्दाख में आठ स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के चुनाव कराने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।

LAHDC का चुनाव कैसे होता है?

लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम में संशोधन के बाद अब हर काउंसिल में कम से कम 7 सीटें और अधिक से अधिक 24 सीटें होंगी। पहले हर काउंसिल में 26 सीटें थीं। लेकिन अब परिसीमन के बाद स्थिति बदल जाएगी।

LAHDC के पार्षदों को प्रत्यक्ष तरीके से जनता द्वारा चुना जाता है। चुनाव जीतने के बाद चुने गए पार्षद एक मुख्य कार्यकारी पार्षद का चुनाव करते हैं। यह कैबिनेट मंत्रियों की तरह कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े फैसले लेते हैं।

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