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गर्दन की नस पर पड़ रहा था दबाव, 9 साल के बच्चे को बार-बार आ रहा था स्ट्रोक; एम्स जम्मू में जटिल सर्जरी से बचा मासूम

Published: Sat, 26 Sep 2026 03:33 PM (IST)

एम्स जम्मू में 9 वर्षीय बच्चे की सफल न्यूरोसर्जरी हुई, जिसे बार-बार स्ट्रोक जैसे लक्षण थे। सर्जरी के बाद बच्चा ...और पढ़ें

एम्स जम्मू में 9 वर्षीय बच्चे की जटिल न्यूरोसर्जरी। (फाइल फोटो)

एम्स जम्मू में 9 वर्षीय बच्चे की जटिल न्यूरोसर्जरी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एम्स जम्मू में 9 वर्षीय बच्चे की सफल न्यूरोसर्जरी।

  2. बच्चे को बार-बार स्ट्रोक जैसे न्यूरोलॉजिकल लक्षण थे।

  3. सर्जरी के बाद बच्चा स्वस्थ होकर स्कूल जाने लगा।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। बार-बार स्ट्रोक जैसे न्यूरोलाजिकल लक्षणों से जूझ रहे एक नौ वर्षीय बच्चे की अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जम्मू के न्यूरोसर्जरी विभाग ने सर्जरी कर उसे राहत दी। सर्जरी के बाद बच्चे की हालत में सुधार हुआ है और अब उसने फिर स्कूल जाना शुरू कर दिया है।

बच्चे को बार-बार स्ट्रोक जैसे लक्षणों के साथ एम्स जम्मू के बाल रोग विभाग में लाया गया था। जांच और रेडियोलाजिकल परीक्षण में पता चला कि ऊपरी सर्वाइकल स्पाइन में अस्थिरता के कारण मस्तिष्क के पिछले हिस्से तक रक्त पहुंचाने वाली अहम वर्टिब्रल आर्टरी पर दबाव पड़ रहा था। इसके बाद बच्चे को न्यूरोसर्जरी विभाग में रेफर किया गया। डाक्टरों ने सर्जरी करवाने की सलाह दी।

न्यूरोसर्जरी टीम ने सर्जरी कर वर्टिब्रल आर्टरी की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में होने वाली न्यूरोलाजिकल घटनाओं के जोखिम को कम कर दिया। सर्जरी और आपरेशन के बाद की रिकवरी बिना किसी जटिलता के हुई।

यह सर्जरी न्यूरोसर्जरी विभाग के कार्यवाहक प्रमुख तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शौर्य दरबारी ने असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कनव गुप्ता के साथ मिलकर की।इसमें बाल रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. समृति गुप्ता ने बच्चे की प्रारंभिक जांच की।सर्जरी के दौरान विशेष एनेस्थीसिया सपोर्ट डॉ. रक्षा कुंडल, डॉ. संदीपिका डोगरा ने किया।

क्या है क्रैनियोवर्टिब्रल जंक्शन स्टेबलाइजेशन सर्जरी?

क्रैनियोवर्टिब्रल जंक्शन खोपड़ी के आधार और ऊपरी रीढ़ के बीच का वह महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां ब्रेनस्टेम, ऊपरी स्पाइनल कार्ड, महत्वपूर्ण नसें और वर्टिब्रल आर्टरीज स्थित होती हैं। इस क्षेत्र में अस्थिरता या किसी संरचना पर दबाव पड़ने से गंभीर न्यूरोलाजिकल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ऐसी कई स्थितियां जन्मजात होती हैं, लेकिन इनके लक्षण बाद में भी सामने आ सकते हैं। इनमें गर्दन में दर्द, सिरदर्द, चक्कर, संतुलन बिगड़ना, कमजोरी, चलने में परेशानी और दुर्लभ मामलों में स्ट्रोक जैसे न्यूरोलाजिकल लक्षण शामिल हो सकते हैं।

सर्जरी के बाद डाक्टर ने क्या कहा?

डॉ. शौर्य दरबारी ने बताया कि क्रैनियोवर्टिब्रल जंक्शन की सर्जरी में बेहद सावधानीपूर्वक योजना की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस क्षेत्र में ब्रेनस्टेम, ऊपरी स्पाइनल कार्ड और वर्टिब्रल आर्टरीज बेहद करीब होती हैं।

बच्चों में हड्डियों का आकार छोटा होने और जन्मजात संरचनात्मक विविधताओं के कारण ऐसी सर्जरी और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है। सुरक्षित परिणामों के लिए समय पर निदान, विस्तृत इमेजिंग और सर्जिकल तथा एनेस्थीसिया टीम के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

सभी को दी बधाई

एम्स जम्मू के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रोफेसर (डॉ.) संजीव सिन्हा ने सर्जरी में शामिल सभी टीमों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस तरह की सर्जरी तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, क्योंकि यह ब्रेनस्टेम, स्पाइनल कार्ड, वर्टिब्रल आर्टरीज और अन्य महत्वपूर्ण न्यूरल संरचनाओं के बेहद करीब की जाती है।