जम्मू, जागरण संवाददाता: पेस्टीसाइड हर चीज का हल नही है। जैविक नियंत्रण करके भी किसान अपनी फसलों को नाशीजीवों से बचा सकते हैं। यह बात किसानों को भली भांति समझाने के लिए एसीआरए-रख ध्यानसर ने किसानों को एक दिन का प्रशिक्षण दिया और नाशीजीवों पर जैविक नियंत्रण का तरीका बताया।

यह कार्यक्रम एआईसीआरपी-बायो कंट्रोल की मदद से कराया गया। खड़ाआ और मढ़ाना गांव के लोगों ने इसमें बढ़चढ़ कर शिरकत की और प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाभ उठाया। मौके पर फेरोमोन ट्रेप भी किसानों को उपलब्ध कराए गए। यह वो मशीन है जिसमें कीट प्रबंधन होता है। इस मशीन को स्थापित करने की विधि से किसानों को अवगत कराया गया। किसानों को तना छेदक व फॉल आर्मी वार्म कीट के बारे में भी जानकारी दी गई व इसके प्रबंधन की विधि बताई गई।

फॉल आर्मी वार्म कीट बरसात में फसलों को खूब नुकसान पहुंचाता है। बजाई के 15 दिनों बाद ही यह कीट फसल को बर्बाद कर देता है। एक बार इस कीट का हमला हो गया तो यह कीट पूरे साल बना रह सकता है। इसकी लार्वा अवस्था ही मक्का की फसल को बड़ा नुकसान करती है। आसपास मक्का न मिलने पर यह कीट दूसरी फसलों पर भी जा सकते हैं।

डा. एपी सिंह ने किसानों को खेती की आधुनिक तकनीक से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मक्की की फसल को किसान किस तरह से सुरक्षित कर सकते हैं ताकि वे अधिक से अधिक लाभ प्राप्त कर सकें। अन्य वैज्ञानिकों में डा. रीना (पीजे एआईसीआरपी- बायाे कंट्रोल), डा. सोनिका जम्वाल, डा. रोहित शर्मा, डा. जय कुमार, डा.विकास गुप्ता सभी ने जैविक तरीके से मक्की की फसल बचाने पर बल दिया और इसके विभिन्न तरीकों से किसानों को अवगत कराया। वहीं किसानोंं ने भी वैज्ञानिकों से कई सावल पूछ कर अपनी जिज्ञासा को शांत किया। 

Edited By: Rahul Sharma