जम्मू, नवीन नवाज। पूरे देश की सियासत को प्रभावित करने वाले अनुच्छेद 370 को इतिहास का हिस्सा बने 100 दिन पूरे हो गए हैं। यही अनुच्छेद कश्मीर में आतंकवाद, अलगाववाद और तथाकथित राजनीतिक परिवारवाद और भ्रष्टाचार की जड़ माना जाता रहा है। इसके समाप्त होने के साथ ही डोगरा शासकों द्वारा गठित जम्मू कश्मीर रियासत भी अतीत के पन्नों में समा गई है और हिंदुस्तान के नक्शे पर दो नए केंद्र शासित राज्य जम्मू कश्मीर और लद्दाख अस्तित्व में आ चुके हैं। प्रशासनिक व्यवस्था बदल चुकी है और नए नारों के साथ नए राजनीतिक समीकरण उभर रहे हैं, जिसके साथ लगातार बढ़ती उम्मीदों के बीच आमजन उस लोकतंत्र को महसूस करना चाहता है जो एक वर्ग की तुष्टिकरण की नीतियों के कारण उससे दूर खड़ा था।

एक निशान-एक विधान का हिस्सा बनने के बाद जम्मू कश्मीर में प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव को साफ तौर पर महसूस किया जा सकता है। राज्य में पैदा होने वाली बेटियां अब राज्य से बाहर ब्याही जाने पर गैर नहीं। राज्य की किसी भी महिला, उसके पति या बच्चों को स्टेट सब्जेक्ट की आड़ में राज्य में संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। देश का कोई भी नागरिक अब खुद को जम्मू कश्मीर में बाहरी नहीं समझेगा। राज्य में देश के विभिन्न हिस्सों से नौकरी करने वाले खुद को राज्य का नागरिक समझेंगे और बेहतर तरीके से जम्मू कश्मीर के विकास में योगदान करेंगे। जमीन-जायदाद की खरीद-फरोख्त के पंजीकरण की जिम्मेदारी न्यायपालिका से लेकर राजस्व विभाग के अधीनस्थत स्थापित रजिस्टरी ङ्क्षवग को सौंप दी गई है।

लोगों को रजिस्टरी के नाम पर जो भारी भरकम फीस अदालत में जमा करानी पड़ती थी, उससे मुक्ति मिल गई है। प्रत्येक तहसील के आधार पर रजिस्टरी कार्यालय की सुविधा है। पुलिस की कार्य प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए अभियोजन ङ्क्षवग को भी अलग कर दिया गया है। नए कॉलेजों, मेडिकल कॉलेजों और कैंसर इंस्टीट्यूट की स्थापना पर काम शुरू हो चुका है। राज्य में विभिन्न कंपनियों द्वारा करीब 15000 करोड़ के निवेश की योजनाओं के प्रस्ताव दाखिल किए जा चुके हैं। रोजगार के क्षेत्र में नए अवसरों का सृजन हो रहा है। सुरक्षाबलों में भर्ती की प्रक्रिया में तेजी आई है।

पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 समाप्त होने और जम्मू कश्मीर के दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित होने से अगर कोई सबसे बड़ा प्रत्यक्ष बदलाव आया है तो वह आतंकवाद और अलगाववाद को पोषित करने वाली तथाकथित मुख्यधारा की सियासत में। अलगाववादी खेमा पूरी तरह शांत हो चुका है। आटोनामी और सेल्फ रूल का नारा देने वाली सियासत लगभग बंद हो चुकी है। नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अगर किसी सार्वजनिक मंच पर नजर आते हैं तो वह अपने घोषित राजनीतिक एजेंडे की बात नहीं करते। अब वह शांति, सौहार्द की बात करते हैं। गिलानी और मीरवाइज सरीखे अलगाववादी अब जिहाद का आह्वान या कश्मीर बनेगा पाकिस्तान का नारा नहीं लगा रहे हैं। इससे आम लोगों ने राहत महसूस की है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ और राज्य के निवासी :

अब विकास की मांग: कश्मीर के वरिष्ठ पत्रकार अहमद अली फैयाज के मुताबिक, पांच अगस्त ने पूरा कश्मीर बदल दिया है। मेरा मानना है कि अब ऑटोनामी, सेल्फ रूल और आजादी की जगह अब पूर्ण राज्य और विकास की मांग की जाएगी।

सुरक्षाबलों को और सावधानी बरतने की जरूरत: कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ रमीज मखदूमी और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) दिलावर ङ्क्षसह ने कहा कि वादी में अब पहले की तरह राष्ट्रविरोधी प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं। पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो चुकी है। यह पांच अगस्त को हुए फैसले का ही असर है। बीते तीन माह में जिस तरह से बाहरी श्रमिकों और ट्रक चालकों का कत्ल हुआ है, वह कश्मीर में सक्रिय आतंकियों की हार और हताश का सुबूत है। अब सुरक्षाबलों को ज्यादा सावधानी बरतने और आतंकियों व उनके समर्थकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जरूरत है।

अब नहीं सुनाई देते नारे: चाडूरा निवासी मोहम्मद यूसुफ डग्गा ने कहा कि बीते तीन माह में सबसे बड़ी राहत की बात यह कि हमें अब आजादी के नारे नहीं सुनने पड़ रहे हैं। हमने तीन माह में यहां नौजवानों के जनाजे नहीं देखे हैं, खुदा का शुक्र है। मेरे जैसे जमींदारों को भी पहली बार सरकारी रेट पर घर में ही सेब बेचने का मौका मिला है।

मलेशिया, बांग्लादेश से भी टूरिस्ट ऑपरेटर कर रहे संपर्क: पर्यटन जगत से जुड़े रमन शर्मा ने कहा कि हमारे पास सिर्फ मुंबई, दिल्ली या कोलकाता से ही नहीं मलेशिया, बांग्लादेश से भी टूरिस्ट टुअर ऑपरेटर संपर्क कर रहे हैं। लद्दाख के लिए अलग से बुकिंग हो रही है। अब इंटरनेट सेवा को पूरी तरह बहाल किया जाना चाहिए। यह पर्यटकों की जरूरतों में एक है।

जल्द हो विधानसभा चुनाव: जम्मू निवासी अनिल शर्मा और श्रीनगर निवासी मुख्तार अहमद ने कहा कि अब यहां विधानसभा चुनाव जल्द होने चाहिए, ताकि एक नया राजनीतिक नेतृत्व जल्द उभरे और लोग 70 साल में पहली बार असली लोकतंत्र को महसूस कर सकें। इसके साथ ही यहां अल्पसंख्यकों के अधिकार बहाल होने चाहिए, लोकपाल की नियुक्ति जल्द होनी चाहिए। सूचना का अधिकार का नियम पूरी तरह से लागू होना चाहिए। नयी औद्योगिक इकाइयों का विकास होना चाहिए।

Posted By: Rahul Sharma

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