जम्मू, राज्य ब्यूरो : कश्मीर केंद्रित सरकारों के भेदभाव के कारण सुलग रहे लद्दाख को कश्मीर से आजादी के एक साल में विकास के कई तोहफे मिले। अनुच्छेद 370 हटने के साथ पांच अगस्त को लद्दाख की खुशियों का एक साल पूरा हो रहा है।

केंद्र शासित प्रदेश बनना लद्दाख की पुरानी मांग थी। ऐसे में यह मांग पूरी होने के बाद से लद्दाख में जन आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर मुहिम जारी है। सेंट्रल यूनिवर्सिटी, मेडिकल कॉलेज, बीएडी कॉलेजों के साथ विकास के कई बड़े प्रोजेक्ट लद्दाखियों की तकदीर बदल रहे हैं। कश्मीर केंद्रित सरकारों के आगे हाथ फैलाने वाले लद्दाख को अब दिल खोल कर केंद्रीय सहायता मिल रही है। कश्मीर केंद्रित सरकारों में लद्दाख मामलों का विभाग कभी क्षेत्र की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। आज लद्दाख के पास अपना विकास खुद करने के लिए सभी विभाग हैं। इन विभागों में स्थानीय युवाओं को नियुक्त किया जा रहा है। केंद्र इन विभागों को पूरा सहयोग दे रहा है।

पांच अगस्त से पहले ही मोदी सरकार ने लद्दाख को बिजली उपलब्ध करवाने के लिए इसे नार्दन ग्रिड से जोड़ दिया था। पांच अगस्त के बाद लद्दाख में सड़कों, पुलों, टनलों व बिजली के प्रोजेक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जा रहा है। लद्दाख के तेज विकास के लिए चालू वित्त वर्ष के बजट में केंद्र सरकार ने 5958 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है। प्रदेश में बुनियादी ढांचे को विकसित कर विकास कार्यों को तेजी दी जा रही है।

लद्दाख के लोगों में विश्वास की भावना को बल देने के लिए क्षेत्र में पाकिस्तान व चीन से सटे इलाकों में सेना को मजबूत बनाया जा रहा है। लद्दाख में सेना को मजबूत बनाकर पड़ोसी देशों के मंसूबे नाकाम बनाना लोगों की पुरानी मांग थी। अब सीमांत क्षेत्रों में बन रहे पुलों व सड़कों के कारण दूरदराज के लोगों को लाभ हो रहा है।

पूरी हो रही लोगों की उम्मीदें : जामयांग

भाजपा सांसद जामयांग त्सीङ्क्षरग नांग्याल का कहना है कि 70 वर्षों के इंतजार के बाद लद्दाख से सौतेला व्यवहार खत्म हुआ है। क्षेत्र में विकास व प्रगति का दौर शुरू होने से लद्दाख के लोग बहुत खुश हैं। पहले उन्हें हर क्षेत्र में पीछे रखा जाता था। अब वह समय आ गया है कि जब लद्दाखी आगे आकर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्र सरकार लोगों के मसले हल करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है। लेह व कारगिल के लोग यही चाहते थे। 

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