जम्मू, रोहित जंडियाल: अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर की आवोहवा ही बदल गई है। हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहे नए जम्मू कश्मीर में अब स्वास्थ्य क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हो रहा है। दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थानों (एम्स) सहित कई अहम प्रोजेक्ट शुरू हो चुके हैं। अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण लगने के अलावा डॉक्टरों की कमी भी दूर हो रही है। इससे प्रदेश के मरीजों को बाहरी प्रदेशों में जाने की जरूरत नहीं रहेगी। जम्मू कश्मीर कई बड़े निजी चिकित्सा संस्थानों ने यहां आने की हामी भर दी है। रही सही कसर कोरोना ने चिकित्सा क्षेत्र को मजबूत करने में पूरी की।

प्रगति पर चिकित्सा क्षेत्र : प्रदेश के दूरदराज जिलों में मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। राजौरी, कठुआ, बारामुला और अनंतनाग में मेडिकल कालेज खुले। डोडा में इस सत्र से मेडिकल कॉलेज को खोलने की तैयारी चल रही है। दो और कॉलेजों को मंजूरी मिल गई है। इनमें एक ऊधमपुर में होगा। जम्मू-कश्मीर ऐसा पहला केंद्र शासित प्रदेश होगा जहां पर दो एम्स स्थापित हो रहे हैं। इसी सत्र से एम्स विजयपुर और अवंतीपोरा को खोलने की तैयारी है। जम्मू संभाग के सांबा के विजयपुर में एम्स की एमबीबीएस की कक्षाएं कठुआ मेडिकल कॉलेज में चलेंगी। जम्मू में 120 करोड़ से कैंसर इंस्टीट्यूट का काम भी चल रहा है। यह साल 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है।

अस्पतालों में सुविधाएं भी बढ़ रहीं : 50 साल पहले खुले जम्मू के मेडिकल कॉलेज में मात्र एक ही एमआरआइ मशीन लगी है। अब एक और एमआरआइ मशीन लगाई जा रही है। श्रीनगर मेडिकल कालेज में पहले ही एक अतिरिक्त एमआरआइ मशीन लगा दी है। इसी तरह कोरोना के कारण भी सुविधाओं में विस्तार हुआ। पहले पूरे जम्मू-कश्मीर में 200 वेंटीलेटर थे, लेकिन अब केंद्र 400 अतिरिक्त वेंटीलेटर जम्मू-कश्मीर को दे रही हे। यह वेंटीलेटर अस्पतालों में आना शुरू हो गए हैं।

खुली कई लैब : जम्मू-कश्मीर में कोरोना की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जम्मू, सीडी अस्पताल श्रीनगर, स्किम्स सौरा कश्मीर, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटीग्रेटेड मेडिसीन सहित पांच और नए मेडिकल कॉलेजों में लैब स्थापित हो चुकी हैं। जिला अस्पतालों में भी लैब स्थापित करने की तैयारी चल रही है। इससे टेस्ट करने की क्षमता एक दिन में 20 हजार के आसपास हो जाएगी।

वैकल्पिक चिकित्सा व्यवस्था में सुधार : जम्मू-कश्मीर में चार दशक से बंद पड़े आयुर्वेद कॉलेज को दो साल पहले खोला गया था। अब इसी सत्र से कश्मीर में यूनानी कॉलेज भी खोलने की तैयारी है। औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। होम्यापैथी कॉलेज खोलने के लिए भी सरकार ने केंद्रीय आयुष मंत्रालय से मंजूरी देने को कहा है। कठुआ जिले में 58 कनाल भूमि अधिग्रहित कर ली है। आयुर्वेद विभाग में सौ हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोलने की प्रक्रिया भी चल रही है।

डॉक्टरों की कम होगी पूरी : अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में डाक्टरों की कमी भी दूर होगी। पहले जम्मू-कश्मीर से बाहर का कोई भी नौकरी नहीं कर सकता था लेकिन अब ऐसा नहीं है। मेडिकल आफिसर्स के 900 पदों के लिए आवेदन निकाले गए हैं। इसकी प्रक्रिया चल रही है। जम्मू-कश्मीर में डेढ़ हजार से अधिक डॉक्टरों के पद खाली हैं।

निजी अस्पताल भी : पहले जम्मू में आचार्य श्री चंद्र मेडिकल कालेज अस्पताल और नारायाणा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल है। अब अमेरिकन आनकालोजी सेंटर भी जम्मू में खुला है। दो और बड़े ग्रुप यहां अस्पताल खोलने की तैयारी कर रहे हैं।

  • जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार जारी हे। कई मेडिकल कॉलेज खुलने के अलावा अस्पतालों में कई सुविधाएं शुरू की गई हैं। केंद्रीय आयुष मंत्री के साथ आयुर्वेद, होम्यापैथी को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाने की जानकारी दी गई। - अटल ढुल्लू, वित्तिय आयुक्त, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग
  • जम्मू-कश्मीर में पांच मेडिकल कालेज खुल गए हैंं। दो और को मंजूरी मिल गई है। दो एम्स खुलना अपने आप में ऐतिहासिक रिकार्ड है। केंद्र ने कोरोना से निपटने के लिए कई उपकरण व अन्य सामान दिया है। - डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री 

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