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जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को 'हीरो' बताने वाली किताब बैन, 8 अधिकारी सस्पेंड; लेखक-प्रकाशक ब्लैक लिस्ट

Published: Sat, 04 Jul 2026 11:26 PM (IST)Updated: Sat, 04 Jul 2026 11:54 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकियों का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों पर बड़ी कार्रवाई हुई है। आठ अधिकारियों को निलंबित कर, एक कर्मचारी को बर्खास्त किया गया।

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को 'हीरो' बताने वाली किताब पर कार्रवाई। फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों को 'हीरो' बताने वाली किताब पर कार्रवाई। फाइल फोटो

HighLights

  1. अलगाववादी पुस्तकों के मामले में आठ अधिकारी निलंबित हुए।

  2. आपत्तिजनक पुस्तकों के लेखक-प्रकाशक ब्लैकलिस्ट, जांच जारी।

  3. सरकारी स्कूलों से सभी विवादित पुस्तकें वापस ली गईं।

जागरण टीम, जम्मू/श्रीनगर। आतंकियों और अलगाववादियों का महिमामंडन करने वाली पुस्तकों के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। आठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। एक संविदा कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। जबकि दोनों आपत्तिजनक पुस्तकों के लेखकों और प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया है। पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी जारी किए गए हैं।

वहीं, जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरियों में पहुंची आ पुस्तकों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश जारी किए हैं।

बता दें कि विवाद उस समय सामने आया जब गत शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर पीपुल्स फोरम ने आरोप लगाया कि जून 2025-26 समग्र शिक्षा योजना के तहत सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में उपलब्ध कराई पुस्तक में सैयद अली शाह गिलानी, मसरत आलम व मीरवाइज उमर फारूक जैसे अलगाववादियों के विचारों को बढ़ावा दिया है। आतंकियों और पत्थरबाजों को 'हीरो' के रूप में प्रस्तुत किया है।

विशेषज्ञ समितियों ने 463 पुस्तकों का किया था परीक्षण

बताया जाता है कि सरकारी स्कूलों के लिए उपयुक्त पुस्तकों के चयन के लिए गठित विशेषज्ञ समितियों ने 463 पुस्तकों का परीक्षण किया था। इनमें दो पुस्तकों 'पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स आफ जेएंडके' तथा 'ग्रेट पर्सनैलिटीज आफ जम्मू एंड कश्मीर' में कथित रूप से ऐसा कंटेंट पाया जो अलगाववाद व आतंकवाद से जुड़ा होने के साथ सामाजिक अशांति पैदा करने की क्षमता रखता है।

सरकारी आदेश में कहा कि 'पर्सनैलिटीज एंड लीजेंड्स आफ जेएंडके' की 123 प्रतियां जम्मू, रामबन व ऊधमपुर जिलों में भेजी थीं, जबकि दूसरी पुस्तक की 128 प्रतियां जम्मू व बारामुला में वितरित की थीं। सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) अश्विनी कुमार को इस मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया है। उन्हें 30 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी प्रतियां वापस, जांच शुरू

स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त सचिव राम निवास शर्मा ने पुष्टि की कि पुस्तक को सभी स्कूलों से वापस ले लिया गया है। पुस्तक के अनुमोदन, खरीद और वितरण से जुड़े सभी स्तरों की जांच की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी देखा जाएगा कि पुस्तक के चयन और वितरण में किन-किन अधिकारियों की भूमिका रही।

किताब पढ़ने के बाद करूंगा टिप्पणी

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने न तो यह पुस्तक पढ़ी है और न ही इसके बारे में पहले सुना था। इसकी सामग्री देखने के बाद ही मैं इस पर टिप्पणी करूंगा। वहीं, राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद ने कहा कि पुस्तक में अलगाववाद, आतंकवाद और भारत विरोधी सोच को बढ़ावा दिया गया है।

इससे कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा मिल सकता है। वहीं, राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने बताया कि इन पुस्तकों के माध्यम से स्कूलों में राष्ट्रविरोधी विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।