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जम्मू-कश्मीर में 5G मिलेगी रफ्तार, 'राइट ऑफ वे' मंजूरी में मनमानी पर रोक

Published: Fri, 30 Oct 2026 09:08 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में 5G नेटवर्क विस्तार को गति देने के लिए सरकार ने राइट ऑफ वे (RoW) मंजूरी में मनमानी पर रोक लगा दी है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. RoW मंजूरी में मनमानी पर रोक, 5G विस्तार तेज होगा।

  2. आवेदन समय पर निपटाने होंगे, अतिरिक्त शुल्क पर पाबंदी।

  3. हर विभाग में नोडल अधिकारी, समन्वय और निगरानी करेंगे।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार में अब प्रशासनिक अड़चनें और मनमानी नहीं चलेगी। सरकार ने सभी प्रशासनिक विभागों, स्थानीय निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अन्य सरकारी संस्थाओं को दूरसंचार अधिनियम, 2023 तथा दूरसंचार (राइट आफ वे-आरओडब्लयू) नियम, 2024 लागू करने के निर्देश दिए हैं।

इसके तहत दूरसंचार बुनियादी ढांचे के लिए मिलने वाले आवेदनों का पारदर्शी तरीके से निर्धारित समय-सीमा में निपटारा करना अनिवार्य होगा। अधिकारियों को कानूनी प्रावधानों से बाहर अतिरिक्त शर्तें, शुल्क और अनुमतियां थोपने की भी इजाजत नहीं होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतर-विभागीय अड़चनों को एकल-खिड़की व्यवस्था के तहत बिना अनावश्यक देरी दूर करना होगा।

ये निर्देश अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगे। किसी विरोधाभास की स्थिति में केंद्र सरकार के कानूनों, नियमों और निर्देशों को प्राथमिकता दी जाएगी।

महाप्रशासनिक विभाग ने उपराज्यपाल के आदेश पर शुक्रवार को इस संदर्भ में एक आवश्यक आदेश -1699-जेके(जीएडी) जारी कर यह व्यवस्था लागू की है।

इसका मकसद आप्टिकल फाइबर, 5जी , भारतनेट और अन्य आधुनिक संचार नेटवर्क के विस्तार को गति देना तथा अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना है।

बिना कारण आवेदन खारिज करने पर रोक

सरकारी संपत्तियों का प्रबंधन करने वाले निकायों को दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना, संचालन, रखरखाव, मरम्मत और स्थानांतरण में सहयोग करना होगा।

रास्ते के अधिकार यानी राइट आफ वे (आरओडब्लयू) से जुड़े आवेदनों का निर्धारित कानूनी समय-सीमा में निष्पक्ष और शीघ्र निपटारा करना होगा। किसी आवेदन को खारिज करने से पहले उसके उचित कारण लिखित रूप में दर्ज करना अनिवार्य होगा। जहां लागू हो, आवेदन दूरसंचार विभाग की निर्धारित ऑनलाइन प्रणाली के जरिए निपटाए जाएंगे।

भारतनेट को परिसर, बिजली और निर्बाध पहुंच

भारतनेट और अन्य सरकारी दूरसंचार परियोजनाओं के लिए जरूरत के मुताबिक सरकारी भवन, ग्राम पंचायत भवन और अन्य परिसर उपलब्ध कराने होंगे।

भारतनेट परियोजना प्रबंधन एजेंसियों, भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और अन्य अधिकृत संस्थाओं के प्रतिनिधियों को निर्बाध प्रवेश दिया जाएगा।

आवश्यकता पड़ने पर चौबीसों घंटे पहुंच सुनिश्चित करनी होगी। सरकारी परिसरों में उपकरण लगाने के लिए बिजली कनेक्शन और जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। भारतनेट के लिए समर्पित बिजली कनेक्शन, निर्धारित मासिक शुल्क और केंद्रीकृत भुगतान की व्यवस्था लागू करने पर जोर दिया गया है।

नेटवर्क की सुरक्षा, खुदाई पर नियंत्रण

सरकारी संपत्तियों पर स्थापित या उनके नीचे से गुजरने वाले दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा संबंधित निकायों की जिम्मेदारी होगी। सड़क निर्माण और अन्य उपयोगिता परियोजनाओं में जुटी एजेंसियों को सेवा प्रदाताओं से समन्वय करना होगा, ताकि केबल को नुकसान न पहुंचे। क्षति होने पर बहाली और मुआवजे का निपटारा कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगा।

बार-बार खुदाई रोकने के लिए साझा डक्ट, कंड्यूट और केबल कॉरिडोर के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा। तकनीकी रूप से संभव होने और स्वीकृत समझौतों के तहत सरकारी ऑप्टिकल फाइबर तथा ऑप्टिकल ग्राउंड वायर (OPGW) का भी उपयोग किया जा सकेगा।

हर विभाग में जवाबदेही तय

सभी विभागों, निगमों, बोर्डों, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को निर्धारित रैंक का नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा। ये अधिकारी लंबित आवेदनों की निगरानी, समन्वय और समयबद्ध निपटारे के साथ अनुपालन रिपोर्ट के लिए जिम्मेदार होंगे।

सूचना प्रौद्योगिकी विभाग समन्वय और निगरानी करेगा तथा नोडल अधिकारियों की अद्यतन सूची रखेगा। उपायुक्तों, जिला मजिस्ट्रेटों और विभागाध्यक्षों को संभाग से पंचायत स्तर तक निर्देश लागू कराने होंगे।