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जम्मू ने कचरे का पक्का इलाज खोजा, कोट भलवाल का हाईटेक प्लांट देख चौंक जाएंगे; 400 टन कचरा ऐसे हो रहा प्रोसेस

Published: Sat, 19 Sep 2026 07:00 AM (IST)

जम्मू नगर निगम ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अभियान के तहत शहर के 50% कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित किया है। ...और पढ़ें

शहर के बाहरी क्षेत्र कोट भलवाल में कचरे को समेटती जेसीबी।

शहर के बाहरी क्षेत्र कोट भलवाल में कचरे को समेटती जेसीबी।

अंचल सिंह, जम्मू। शहर को खुले डंपिंग यार्ड की बदबू और कचरे के ढेरों से मुक्ति दिलाने के लिए जम्मू नगर निगम का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन अभियान अब धरातल पर दिखने लगा है। नगर निगम ने कोट भलवाल में वैज्ञानिक तकनीक पर आधारित मुख्य सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित करने के साथ ही शहर के विभिन्न हिस्सों में विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग यूनिटों का एक प्रभावी नेटवर्क तैयार किया है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और सालिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स के कड़े मानकों के तहत संचालित इस व्यवस्था के चलते आज जम्मू शहर से निकलने वाले कुल कचरे के 50 प्रतिशत हिस्से का वैज्ञानिक पद्धति से सफल निस्तारण किया जा रहा है, जिससे शहर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा मिली है।

कोट भलवाल मुख्य प्लांट की कार्यप्रणाली और क्षमता

जम्मू शहर और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना लगभग 350 से 400 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे के बड़े हिस्से को संभालने के लिए कोट भलवाल में आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट क्रियाशील है, जिसकी कुल क्षमता 350 से 500 मीट्रिक टन तक कचरा प्रोसेस करने की बनाई गई है।

इस मुख्य यूनिट में प्रतिदिन करीब 100 मीट्रिक टन सूखे कचरे का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित ठिकाना लगाया जा रहा है। यहां सूखे कचरे को प्रोसेस करके रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल तैयार किया जाता है, जो सीमेंट फैक्ट्रियों और बिजली संयंत्रों में कोयले के स्वच्छ विकल्प के रूप में काम आता है।

साथ ही प्लास्टिक, धातु, कांच और गत्ते जैसी रीसाइक्लिंग सामग्री को छांटकर अधिकृत रीसाइक्लर्स तक पहुंचाया जाता है, जबकि गीले कचरे को कंपोस्टिंग यूनिट में डालकर खाद में बदला जा रहा है।

नरवाल, बंधु रक्ख और भगवती नगर में विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग

कचरा प्रबंधन के इस माडल को शहर भर में विकेंद्रीकृत किया गया है, ताकि पूरे कचरे का बोझ किसी एक जगह पर न पड़े। इसके तहत बंधु रक्ख और नरवाल में छोटे प्रोसेसिंग यूनिट लगाए गए हैं, जहां गीले कचरे से सीधे जैविक खाद तैयार की जाती है।

इसी तरह धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय बाजारों से निकलने वाले नारियल के छिलकों और अपशिष्ट के त्वरित निस्तारण के लिए भगवती नगर में विशेष कोकोनट क्रशिंग यूनिट स्थापित की गई है। इसके अतिरिक्त शहर के होटल, बड़े व्यावसायिक संस्थान और बैंक्वेट हाल जैसे बल्क वेस्ट जनरेटर नियमों के तहत अपने स्तर पर ही कचरे का प्रसंस्करण कर रहे हैं।

इन सभी प्रयासों के समन्वय से कोट भलवाल पर कचरे का अनावश्यक दबाव कम हुआ है और स्थानीय स्तर पर ही कचरा उपयोगी उत्पादों में बदल रहा है।

परियोजना की लागत और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था

स्वच्छ भारत मिशन और जम्मू स्मार्ट सिटी परियोजना के वित्तीय सहयोग से इस पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 40 से 50 करोड़ की लागत आई है। इस बजट से अत्याधुनिक प्रोसेसिंग मशीनरी, शेड, लीचेट ट्रीटमेंट प्लांट और साइंटिफिक लैंडफिल सेल का निर्माण किया गया है।

घरों और बाजारों से डोर-टू-डोर कलेक्शन के जरिए एकत्र कचरे को बंधु रक्ख और भगवती नगर स्थित मटीरियल रिकवरी फैसिलिटी में पहले गीले, सूखे और खतरनाक श्रेणियों में बांटा जाता है।

इसके बाद जीपीएस-सक्षम पूरी तरह से ढके हाइड्रोलिक काम्पेक्टर वाहनों के माध्यम से इसे कोट भलवाल भेजा जाता है, जिससे सड़कों पर कचरा गिरने या बदबू फैलने की गुंजाइश खत्म हो गई है।

पर्यावरण सुरक्षा और स्वच्छता रैंकिंग में सुधार

प्लांट में स्थापित लीचेट ट्रीटमेंट सिस्टम से बारिश के दिनों में भी जहरीला पानी जमीन में नहीं रिस पाता, जिससे भूजल और वायु प्रदूषण के बड़े खतरे को पूरी तरह टाल दिया गया है। बंधु रक्ख जैसे पुराने डंपिंग स्थलों पर जमा कचरे के पहाड़ों को बायो-माइनिंग प्रक्रिया से तेजी से समाप्त कर उस जमीन को हरित पट्टी में बदला जा रहा है।

वैज्ञानिक छंटाई, स्थानीय स्तर पर खाद बनाने और कोट भलवाल में बड़े पैमाने पर आरडीएफ निर्माण की इस एकीकृत व्यवस्था से जम्मू शहर राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में अपनी स्थिति निरंतर मजबूत कर रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

जम्मू नगर निगम आयुक्त डा. देवांश यादव बताते हैं कि शहर से निकलने वाले करीब 50 प्रतिशत कचरे का कोट भलवाल प्रोसेसिंग यूनिट में सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही बल्क वेस्ट जनरेटर स्वयं अपने कचरे को ठिकाने लगा रहे हैं, जबकि नरवाल और बंधु रक्ख में स्थापित छोटे यूनिटों में खाद बनाई जा रही है।

भगवती नगर में भी विशेष यूनिट सक्रिय है। शहर में विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू होने से अधिकांश कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण सुनिश्चित हो रहा है।