जम्मू, रोहित जंडियाल:  कोरोना संक्रमण के खिलाफ योजनाबद्ध तरीके से शुरू हुई लड़ाई जीत की ओर पहुंच रही है। इसके परिणाम कुछ माह पहले से ही दिखने लगे थे। सरकार और प्रशासन में समन्वय का ही नतीजा है कि जम्मू कश्मीर में कोरोना के सिर्फ एक फीसद मामले ही सक्रिय रहे गए हैं। अन्य सभी स्वस्थ होकर घरों में चले गए हैं। सिर्फ सांबा जिला ही ऐसा है, जहां पर साढ़े तीन फीसद मरीज सक्रिय हैं। ऊधमपुर और गांदरबल जिले में भी दो फीसद के आसपास मरीज सक्रिय हैं। अन्य जिलों में सक्रिय मरीजों की संख्या एक फीसद के आसपास या इससे भी कम हैं।

जम्मू और श्रीनगर जिलों में कोरोना के सबसे अधिक मामले आए, लेकिन अब दोनों ही जिलों में एक फीसद से भी कम मामले रह गए हैं। अन्य अठारह जिलों में भी सिर्फ ऊधमपुर, गांदरबल, और सांबा जिलों में ही मामले अधिक हैं। जम्मू संभाग के रियासी, किश्तवाड़, कठुआ और राजौरी जिलों में 0.30 फीसद के आसपास ही मरीज रह गए हैं। यह वे जिले हैं, जहां पर इस समय सबसे कम मरीज रह गए हैं। कश्मीर में भी गांदरबल जिले को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी जिलों में एक फीसद के आसपास ही मामले रह गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में लगातार चलाए जा रहे अभियानों के कारण ही सक्रिय मामलों की संख्या में कमी आई है।

प्रदेश पर नजर

  • 1,23,425 मरीज अब तक मिले हैं।
  • 1,20,392 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।
  • 1922 की मौत हो चुकी है।
  • 1224 मामले ही सक्रिय हैं अब।

सभी की हो रही जांच: प्रदेश में कोरोना का पहला मामला आने के बाद ही सरकार सक्रिय हो गई थी। इसके बाद अन्य प्रदेशों से लौटने वाले सभी लोगों की जांच होती थी। बिना जांच के किसी को भी जम्मू कश्मीर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता था। हवाई मार्ग, रेल मार्ग और सड़क मार्ग तीनों ही रास्तों में आरटी-पीसीआर टेस्ट होते थे। अब रैपिड टेस्ट हो रहे हैं। मामले कम होने के बाद अब भी सभी के टेस्ट हो रहे हैं। अन्य प्रदेशों में जब बिना लक्षण वाले मरीजों को घरों में रह कर ही इलाज करने की इजाजत मिल गई थी, जम्मू कश्मीर ने इसके कई महीनों के बाद यह सुविधा शुरू की। अब परिणाम सभी के सामने है।

ऐसे चला मरीजों के ठीक होने का सिलसिला: जम्मू-कश्मीर में पहला मामला आठ मार्च 2020 को आया था। अप्रैल महीने तक करीब सौ लोगों में ही संक्रमण की पुष्टि हुई थी, लेकिन अगले तीन महीनों में मामले बढ़े और संक्रमितों की संख्या जुलाई के अंत तक ढाई हजार पहुंच गई। अच्छी बात यह थी कि 61 फीसद मरीज तब तक स्वस्थ हो चुके थे। अगस्त महीने के अंत तक 77 फीसद, सितंबर महीने के अंत तक 76 फीसद, अक्टूबर महीने के अंत तक 90 फीसद, नवंबर महीने में 94 फीसद, दिसंबर महीने में 97 फीसद और 18 जनवरी तक 99.10 फीसद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो चुके हैं।

स्वास्थ्य कर्मियों की भी जान गई: कोरोना संक्रमण से लड़ते हुए अभी तक राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू में पांच स्वास्थ्य कर्मियों की मौत हो चुकी है। सौ से अधिक संक्रमित हुए हैं। बनिहाल के एक चिकित्सक को भी कोरोना से लड़ते हुए जान गंवानी पड़ी। पूरे जम्मू प्रदेश की बात करें तो संक्रमित होने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या चार सौ से भी अधिक है।

  • स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दिन-रात एक कर कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई लड़ी है। कई कर्मचारी महीनों ड्यूटी पर आते रहे हैं। अभी भी सप्ताह के सातों दिन काम हो रहा है। स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सेवा की है। आज संक्रमितों की संख्या कम जरूर हुई है, लेकिन अभी भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और सभी को गंभीरता से पहले की तरह एसओपी का पालन करना होगा। -डा. जेपी सिंह, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी, जम्मू
  • सभी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारियों, ब्लाक विकास अधिकारियों, डाक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ ने कोरोना के मरीजों के इलाज और उनकी स्क्रीनिंग में अहम भूमिका निभाई है। अब टीकाकरण अभियान भी शुरू हो गया है। लोग आगे भी एसओपी का पालन करें ताकि कोरोना के मामलों को पूरी तरह से खत्म किया जा सके। - डा. रेनू शर्मा, स्वास्थ्य निदेशक जम्मू 

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