पौनी, जुगल मंगोत्रा। सरकार व जनप्रतिनिधियों द्वारा विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। सभी गांवों को सड़क से जोड़ने और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि पौनी तहसील क्षेत्र में आज भी कई ऐसे गांव हैं, जो बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं।

ऐसा ही पौनी तहसील क्षेत्र के दूरदराज का एक गांव है मता, जहां के लोग दस किमी पैदल चलकर पौनी जाते हैं और दस किमी पैदल चलकर घर वापस आते हैं, तब उनके परिवार की भूख मिटती है। मता गांव में सड़क नहीं होने से आज भी खाने-पीने का सामान घोड़ों पर ढोया जाता है। बरसात के मौसम में तो ग्रामीणों की समस्या और ज्यादा गंभीर हो जाती है। रास्ते में मलबा गिरता है और गांव का पौनी से संपर्क कट जाता है, जिससे कई दिनों तक ग्रामीणों को भूखे भी रहना पड़ता है। कस्बे से दस किमी की दूरी पर बसे मता गांववासियों की समस्याएं कब हल होंगी, इसके लिए वे आज भी आस लगाए बैठे हैं। 20 हजार की आबादी वाले दूरदराज के ग्रामीण पेट की भूख मिटाने के लिए रोजाना दस किमी पैदल चलकर पौनी पहुंचते हैं, जिसके बाद वे मवेशियों के लिए घास या फिर अन्य प्रकार की तैयार की गई फसलों की बिक्री करते हैं।

फिर दस किमी पैदल चलकर घर वापस आते हैं। गांववासी का कहना है कि दूरदराज का गांव होने पर ग्रामीणों को अक्सर मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता है। गर्मियों के दिनों में चरोटियां, कचालू, अखरोट, अनारदाना व सर्दियों के दिनों में घास बेच कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। बरसात के मौसम में गांव को जाने वाला रास्ता मलबा आदि गिरने से कट जाता है। गांव मता, ऊपर मता, स्माट, चंडी, बेरीगाला आदि गांवों में बिजली, चिकित्सा, सड़क व पीने के पानी की समस्या है। गांव के लिए पीएमजीएसवाई द्वारा सड़क बनाने के लिए सर्वे किया गया था, लेकिन अभी तक सड़क का काम शुरू नहीं किया गया है।

एक दिन का समय होता है बर्बाद

सरकार व स्थानीय नेता गांव में विकास करवाने के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन गांववासी सड़क, चिकित्सा, पीने के पानी और बिजली की समस्या से आज भी जूझ रहे हैं। कंपकंपाती सर्दियों में कई किमी पैदल चलकर अपने व परिवार के पेट की भूख मिटाने के लिए पीठ पर लादकर घास की गट़्ठे पौनी ले जाकर बेचते हैं तो गर्मियों के दिनों खेतों में तैयार की गई सब्जियों की बिक्री कर परिवार का भरण-पोषण चलाते हैं। मता गांव से सुबह छह बजे अपने घर से निकलने के बाद पौनी में करीब 12 बजे और वापस देर शाम को घर पहुंचते हैं। पूरा एक दिन का समय बर्बाद होने के बाद लोगों का शरीर कई अज्ञात बीमारियों की चपेट में आ जाता है, लेकिन वे अपने परिवार की भूख मिटाने के लिए किसी की भी परवाह नहीं करते हैं। लोगों ने सरकार से पहाड़ी इलाका होने के बावजूद गांव में विकास कराने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो। -पीएमजीएसवाई के तहत नहीं शुरू हो रहा सड़क का काम

दूरदराज होने के कारण गांव में एक-दो दुकानें ही हैं, जिनपर पूरे गांववासी निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि कई बार दुकानों पर राशन खत्म हो जाता है, जिसके बाद ग्रामीणों को भूखे भी रहना पड़ता है। गांववासी किशो राम, पवन कुमार, कपूर ¨सह, मुंशी राम, शेर ¨सह आदि का कहना है कि गांव मता, चंडी, नपाल में सरकार की तरफ से आज तक सड़क नहीं पहुंचाई गई है, जिससे लोगों को दस किमी पैदल चलकर पौनी से गांव के लिए राशन लाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अगर गांव में सड़क हो तो लोग जब चाहे तब बाजार से खाने-पीने की सामग्री ला सकते हैं, लेकिन ग्रामीणों की इस समस्या की ओर सरकार की तरफ से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पौनी के माड़ी क्षेत्र से डक्की कोट तक पीएमजीएसवाई द्वारा करीब 17 किमी सड़क बनाने का टेंडर भरा हुआ है। जहां से काम शुरू होना है वहां संबंधित विभाग की तरफ से लोगों की जानकारी के लिए बोर्ड लगाया गया है, जिसमें सड़क निर्माण में लाखों रुपये खर्च करने के साथ-साथ सड़क निर्माण शुरू करने की जानकारी 19 जुलाई 2017 व निर्माण कार्य समाप्त करने की 18 मार्च 2019 दी गई है, लेकिन सड़क का काम अभी तक शुरू नहीं किया गया है। 

उक्त गांव में सड़क बनाने के लिए टेंडर हो चुके हैं। पीएमजीएसवाई के एक्सईएन से बात करने के बाद जल्द सड़क का काम शुरू करवाया जाएगा। इसके साथ जैसे ही गांव में सड़क पहुंच जाती है, क्षेत्र में अन्य सुविधाएं भी दूर हो जाएंगी। - प्रसन्ना रामास्वामी, डीसी रियासी 

Posted By: Preeti jha

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