गुलदेव राज, जम्मू

कश्मीर के ट्यूलिप गार्डन की तर्ज पर 2008 में भोर कैंप में तैयार जम्मू के सबसे बड़ा फ्लावर गार्डन को फिर से खिलाया जाएगा। 2014 की बाढ़ में यह बर्बाद हो गया था। अब यहां फूलों की रंगत फिर कायम की जाएगी। इसको लेकर फ्लोरिकल्चर विभाग ने सारी तैयारी कर फूलों की रोपाई शुरू कर दी है। काफी काम पूरा भी कर लिया गया है। चंद साल पहले फूलों की रंगत के कारण भोर कैंप पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र था। बाढ़ के बाद यह फूलों का गार्डन पूरी तरह से नष्ट हो गया था। अब इसे पुन: लुक देने के लिए यहां पर 10 ब्लॉकों में फूलों के 100 बेड बनाए गए हैं। हर बेड की लंबाई 150 फुट रखी गई है। 285 कनाल की इस भूमि में विभिन्न किस्मों के 60 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। मार्च-अप्रैल में यहां पर फूलों की रंग बिरंगी चादर फिर से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगी। हर बेड के बीच में रास्ता रखा गया है ताकि पर्यटक टहलते हुए फूलों की रंगत का पूरा आनंद मिल सकें। क्राइसेंथमम, रेड फ्लाक्स, नाइट्रेशन, कैंडी टाप, रेडस्वीट विलियम, व्हाइट पेपर फ्लावर, येलो पेपर फ्लावर आदि किस्म के फूल लगा दिए गए हैं। फ्लावर गार्डन में बैठने के लिए जगह-जगह बेंच भी लगाए जाएंगे। इस गार्डन को संवारने के लिए दर्जनों माली दिन-रत काम पर लगे हैं। ऐसी उम्मीद है कि समय पर फूलों की रंगत यहां आएगी और लोगों को एक बार फिर से अपनी ओर आकर्षित करेगी। वहीं साथ लगते नाले में बाढ़ आने पर पानी गार्डन में न घुसे, इसके लिए गार्डन की पहले ही चारदीवारी की जा चुकी है।

2008 में तब के मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की सोच थी कि कश्मीर की भांति जम्मू में भी ऐसा फ्लावर गार्डन बने जो कि पर्यटकों को अपनी ओर खींचे। इसके लिए एयरपोर्ट के समीप भोर कैंप में भूमि का चयन हुआ ताकि जब फूल खिल जाएं तो हवाई जहाज से जम्मू आने वाले पर्यटकों को लैंडिंग करते समय ही गार्डन की रंगत का नजारा दिख जाए।

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-गार्डन का दूसरा हिस्सा भी शानदार

दरअसल अब भोर कैंप में दो गार्डन बन गए हैं। एक तो फ्लावर गार्डन है जो कि बर्बाद हो गया था। उसके बाद दूसरे हिस्से को सामान्य गार्डन में बदला गया। यह हिस्सा 300 कनाल में है, जहां कई प्रकार के पेड़-पौधे लगाए हैं। हरी भरी घास है तो वहीं झील भी बनाई जा रही है। लोगों का कहना है कि भौर कैंप पर्यटकों को लुभाने की ओर बढ़ रहा है।

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-ताकि समय पर खिलें फूल

जम्मू कश्मीर फ्लावर ग्रोअर्स एसोसिएशन के प्रधान तेजेंद्र ¨सह का कहना है कि अच्छा प्रयास है। मगर प्रशासन को चाहिए कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि इस गार्डन की गरिमा बरकरार रहे। हर साल फूलों को समय पर लगाया जाए। जम्मू में पर्यटन का विकास तभी होगा, जब यहां पर पर्यटकों को दिखाने के लिए कुछ हो।

Posted By: Jagran