जागरण संवाददाता, जम्मू : चंद रुपयों के लिए होटल मालिक लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। मंदिरों के शहर जम्मू की संकरी गलियों में चलने वाले होटल सुरक्षित नहीं हैं। अधिकतर होटल सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। यहां आग जैसी अनहोनी से निपटने के लिए कोई प्रबंध नहीं है। सब कुछ जानकार अग्निशमन विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

जम्मू शहर के ज्यूल चौक, गुम्मट, बस स्टैंड रेजीडेंसी रोड, रघुनाथ बाजार, संत मार्केट चांद नगर आदि ऐसे क्षेत्र हैं, जहां पर हर गली, मोहल्ले में होटलों की भरमार है। दूसरे राज्यों से जम्मू आने वाले पर्यटकों को इन क्षेत्रों में अपने बजट के हिसाब से होटलों में कमरे मिल जाते हैं लेकिन अगर इनमें आग जैसी कोई अनहोनी हो जाए तो जानमाल की भारी क्षति हो सकती है। इतना ही नहीं, संकरी गलियां होने के कारण मौके पर अग्निशमन की गाड़ियां भी नहीं पहुंच सकती। ऐसे में इन होटलों में ठहरने वाले पर्यटकों और वहां काम करने वाले कर्मचारियों के लिए अपनी जान बचाना भी मुश्किल हो जाएगा।

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होटल नीलम में लगी आग

ने ले ली थी चार जाने

जम्मू शहर के बस स्टैंड इलाके स्थित होटल नीलम में लगी आग चार लोगों की जान ले चुकी है। 30 मई, 2014 को इस होटल में लगी आग के कारण अब भी रहस्य बने हैं। आग में चार लोगों की मौत के अलावा चौदह लोग झुलस गए थे। मरने वालों में वे लोग शामिल थे, जो धुंए के कारण बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने से ही उनकी मौत हो गई थी।

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सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति

शहर में चलने वाले अधिकांश होटल सुरक्षा के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। इन होटलों में आग से निपटने के उपकरण आवश्यकता के अनुरूप नहीं लगाए गए हैं। अगर कहीं लगे भी हैं तो उनका रखरखाव नहीं हो रहा है। न उनकी रीफि¨लग हो रही है। इसके अलावा संकरी गलियों में फायर हाइड्रेंट भी नहीं लगाए गए हैं। इतना ही नहीं, आग जैसी स्थिति से निपटने के लिए होटलों में अलग से पानी की टंकी तक भी नहीं बनाई गई हैं ताकि जरूरत पढ़ने पर उससे ही कुछ काम चलाया जा सके। न ही इन होटलों में आपात स्थिति होने पर बाहर निकलने के कोई वैकल्पिक रास्ते हैं।

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होटल निर्माण से पहले होटल प्रबंधकों को आग से निपटने के लिए सुरक्षा मानकों को पूरा करने के सुझाव दिए जाते हैं। नवनिर्मित होटलों में आग लगने की सूरत में पानी के लिए अलग से कम से कम बीस-बीस हजार लीटर वाली दो टंकियां, अग्निशमन सयंत्र, फायर स्मोक सेंसर्स लगाने के लिए कहा जाता है। इसके अलावा आपात स्थिति में अलग से इमरजेंसी एग्जिट प्वाइंट रखने की भी हिदायत दी जाती है।

-मंजूर हुसैन मलिक, डिवीजनल फायर आफिसर

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जम्मू शहर में अग्निशमन

की गाड़ियों की संख्या

गांधीनगर - 10

गंग्याल - 08

पंजतीर्थी - 04

रूप नगर - 02

सचिवालय - 02

केनाल - 02

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कर्मियों की कमी से जूझ रहा है फायर एंड सविर्सेस विभाग

जम्मू कश्मीर का फायर एंड इमरजेंसी विभाग कर्मियों की कमी से जूझ रहा है। राज्यभर में फायर ब्रिगेड कर्मियों के 3582 पद सृजित हैं, लेकिन मौजूदा समय विभाग में 1282 कर्मियों की कमी है। यानि इस समय विभाग 2300 कर्मियों के सहारे चल रहा है। विभाग में इस समय ड्राइवर्स और फायर फाइटर्स की खासी कमी है। एक अधिकारी ने बताया कि मौजूदा स्टाफ से 87 फायर स्टेशन चलाए जा सकते हैं, जबकि राज्यभर में 156 फायर स्टेशन हैं।

Posted By: Jagran