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80 से 100 रुपये में बिक रहा एक फल, किसान हो रहे मालामाल; ऊना में ड्रैगन फ्रूट की रिकॉर्ड पैदावार

By Ritika Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 20 Sep 2026 06:38 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती ने किसानों को मालामाल कर दिया है, इस साल 11.2 मीट्रिक टन की रिकॉर्ड पैदावार हुई है।

ऊना में ड्रैगन फ्रूट की खेती करता किसान। जागरण

ऊना में ड्रैगन फ्रूट की खेती करता किसान। जागरण

HighLights

  1. ऊना में 11.2 मीट्रिक टन ड्रैगन फ्रूट की रिकॉर्ड पैदावार।

  2. किसानों को 80-100 रुपये प्रति फल तक मिल रहे दाम।

  3. ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की आय में वृद्धि।

रीतिका शर्मा, ऊना। कभी नई और प्रयोगात्मक फसल माने जाने वाले ड्रैगन फ्रूट ने अब हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना में अपनी मजबूत पहचान बना ली है। इस साल जिले में अब तक ड्रैगन फ्रूट की 11.2 मीट्रिक टन बंपर पैदावार हुई है। करीब छह हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार हो रही इस फसल की स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली तक जबरदस्त मांग है। 

अच्छी गुणवत्ता और बेहतर दाम मिलने से ड्रैगन फ्रूट उत्पादक बागवानों के चेहरे खिल उठे हैं। इस सीजन में कई बागवानों को 80 से 100 रुपये प्रति फल तक दाम मिले हैं, जबकि पहले यही फल करीब 50 रुपये तक बिकता था।

यहां हो रही खेती

जिले में लोअर बढ़ेड़ा, सलोह, पंजावर, पीपली, गुगलैहड़, कलोह, अंब, बदमाणा, चिंतपूर्णी और लोहारली सहित कई क्षेत्रों में ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है। शुरुआत में किसानों को उत्पादन और पौधों की देखभाल को लेकर दिक्कतें आईं, लेकिन विभागीय मार्गदर्शन, पोषण प्रबंधन और सिंचाई की बेहतर व्यवस्था से अब उत्पादन में लगातार सुधार हो रहा है। जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हुआ सीजन दिसंबर-जनवरी तक चलने की उम्मीद है।

13 कनाल में 45 क्विंटल उत्पादन

अंब के आदर्श नगर निवासी बागवान मुस्ताक गुज्जर वर्ष 2018 से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। शुरुआत में उन्होंने तीन कनाल में पौधे लगाए थे, जिससे पांच से छह क्विंटल उत्पादन मिला। अब करीब 13 कनाल में खेती कर रहे हैं और इस सीजन में जून से अब तक करीब 45 क्विंटल उत्पादन ले चुके हैं। उनका कहना है कि स्थानीय स्तर पर ही उनके फल की इतनी मांग है कि उत्पादन पूरा होने से पहले ही बिक जाता है।

दो हजार से 30 हजार पौधों तक पहुंची खेती

बागवान रीवा सूद ने वर्ष 2017 में करीब दो हजार पौधों से शुरुआत की थी। अब उनके खेतों में करीब 30 हजार पौधे हैं। इस सीजन में वह ढाई टन ड्रैगन फ्रूट बेच चुकी हैं। उन्हें प्रति फल 80 से 100 रुपये तक दाम मिले हैं। स्थानीय बाजार के साथ दिल्ली में भी उनके ड्रैगन फ्रूट की मांग है।

कम जानकारी से शुरू हुई मुश्किलें, अब मिल रहा अच्छा उत्पादन

बदोली के विवेक जोशी ने करीब दो वर्ष पहले ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। उन्होंने करीब 100 पौधे लगाए हैं और प्रति पौधा लगभग एक किलो उत्पादन मिल रहा है। उनका कहना है कि शुरुआत में खेती की तकनीक की कम जानकारी के कारण समस्याएं आईं, लेकिन अब धीरे- धीरे उत्पादन बेहतर हो रहा है।

ऊना में ड्रैगन फ्रूट की संभावनाएं मजबूत

उपनिदेशक बागवानी डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट अपनी अनूठी बनावट, स्वाद और एंटी-आक्सीडेंट गुणों के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। जिला ऊना में करीब छह हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती हो रही है। उन्होंने बताया कि एमआईडीएच के तहत ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा देने के लिए प्रति हेक्टेयर 3.37 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में क्षेत्र और उत्पादन दोनों बढ़ने की संभावना है।

ड्रैगन फ्रूट की खेती में इन बातों का रखें ध्यान

  • ड्रैगन फ्रूट बारहमासी पौधा है और उचित देखभाल से 15- 20 वर्ष या इससे अधिक समय तक उत्पादन दे सकता है।
  • सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम का इस्तेमाल उपयोगी है।
  • पौधों को संतुलित पोषण और जैविक खाद देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
  • एक पोल पर सामान्यतः चार पौधों को सहारा देकर लगाया जाता है।
  • पशुओं से फसल की सुरक्षा के लिए फेंसिंग जरूरी है।
  • अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे और सही किस्म का चयन उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
  • ड्रैगन फ्रूट ताजा खाने के अलावा जैम, जेली, आइसक्रीम, जूस, नेक्टर और अन्य उत्पादों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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