जागरण संवाददाता, ऊना : गुजरात के अहमदाबाद से ऊना में पहुंची श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन में 547 हिमाचलियों ने जैसे ही स्टेशन के प्लेटफार्म पर कदम रखा, कइयों की आंखें खुशी से छलक आई। कुछ इतने भावुक हुए कि मानो इस पल का उन्हें सदियों से इंतजार था। ये लोग गुजरात के विभिन्न हिस्सों में फंसे थे। रविवार को ऊना के रेलवे स्टेशन पर आसमान से बरसती आग भी इन लोगों के खिले चेहरों से खुशी नहीं छीन पाई।

ऊना में दो घंटे देर पहुंची ट्रेन में कांगड़ा से 210, हमीरपुर से 74, मंडी से 82, शिमला से 40, चंबा से 37, बिलासपुर से 23, ऊना से 47, सिरमौर 10, सोलन से 13, कुल्लू से सात और किन्नौर व लाहुल स्पीत से एक-एक यात्री पहुंचे।

कांगड़ा के रक्कड़ निवासी अमित ने बताया कि उनके साथ कई गुजरात के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए थे। मंडी के रणवीर सिंह ने कहा कि सरकार के प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। दो माह से अधिक वक्त उन्हें सदियों से भी ज्यादा महसूस हुआ। स्वाति ने कहा, वह गुजरात में नौकरी करती हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद काम बंद होने से वहां फंस गए थे। अब हिमाचल पहुंचकर आंखों से खुशी के आंसू निकल आए। कांगड़ा के आलिद अवे ने कहा मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद नौकरी के लिए गुजरात गया था। मार्च में नौकरी ज्वाइन करने पहुंचा, लेकिन दो-तीन दिन बाद कोरोना संकट से लॉकडाउन लग गया। दिसंबर में इंटरनशिप करने अहमदाबाद गई निधि शर्मा ने बताया कि उनके लिए हर दिन सालों जैसा रहा। गुजरात में नेटवर्किंग इंजीनियर का काम कर रहे चंबा निवासी यशपाल ने कहा कि प्रदेश सरकार ने बहुत अच्छी व्यवस्थाएं की हैं। हमीरपुर के भोरंज के दुनी चंद और दो माह से जोधपुर में फंसी शिमला निवासी कृतिका ने बताया कि सरकार ने घर पहुंचाकर बहुत बढि़या कदम उठाया है।

Posted By: Jagran

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