जागरण संवाददाता, ऊना : दिल्ली से ऊना पहुंची श्रमिक एक्सप्रेस में सफर करने वाले अधिकांश छात्र अथवा विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले लोग थे। कुछ परिवार भी जो अरसे से फंसे हुए थे वे भी वापस पहुंचे हैं। स्टेशन पर पहुंचे ही रेलगाड़ी से सभी यात्रियों को जिलावार उतारा गया।

प्लेटफॉर्म से बाहर निकलने के लिए जिला प्रशासन ऊना ने दो रास्ते बनाए थे, ताकि यात्रियों को असुविधा न हो। सबसे पहले कांगड़ा जिला के यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर उतारने के बाद उन्हें सैनिटाइज किया गया। इसके बाद हेल्थ डेस्क पर उनकी थर्मल स्क्रीनिग की गई।

स्टेशन से बाहर निकलने से पहले सभी यात्रियों को खाने-पीने की सामग्री तथा पानी की बोतलें व सैनिटाइजर प्रदान किए गए। इसके बाद उन्हें एचआरटीसी की बसों में बिठाकर उनके गंतव्यों की ओर रवाना किया गया।

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राधा स्वामी सत्संग व्यास ने किया खाने का इंतजाम

उपायुक्त संदीप कुमार ने कहा दिल्ली से लौटे सभी यात्रियों व ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के लिए 600 खाने के पैकेट बनाए गए थे और खाने की व्यवस्था राधा स्वामी सत्संग घर भदसाली की ओर से की गई थी।

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दूसरे जिले के लोग पहुंचने पर मची अफरा-तफरी

प्लेटफार्म पर ट्रेन पहुंचते ही घोषणा की गई थी कि जिन जिलों के यात्रियों को सबसे पहले पुकारा जाएगा वे प्लेटफार्म पर उतरेंगे। ऐसे में सबसे पहले कांगड़ा के यात्रियों को नीचे उतारा गया और उनमें ही दो यात्री ऊना जिले के भी साथ-साथ स्क्रीनिग एरिया में पहुंच गए। जब उनसे मुख्य गेट पर स्टेशन का नाम पूछा गया तो उन्होंने जानकारी दी कि वे ऊना जिले से संबंधित हैं। ऐसे में उन्हें फिर से वहां बने मेडिकल हेल्प बूथ तक पहुंचाया गया तो लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। काफी देर के बाद स्थिति स्पष्ट हो पाई कि ये लोग न तो कांगड़ा वाले थे और न ही लक्षण वाले थे, लेकिन गलती से पहले कोच से नीचे आने पर उन्हें अलग बिठाया गया था। सीएमओ डॉ. रमन शर्मा ने बताया कि ऐसे लक्षण वाले रोगियों को इस हेल्प बूथ में प्रारंभिक जांच के बाद उन्हें आगे भेजा जाता है।

Posted By: Jagran

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