ऊना, राजेश शर्मा। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र में चुनाव के अंतिम दौर में भाजपा और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है। अब तक प्रचार में आगे निकल चुकी भाजपा का मुकाबला करने के लिए ऊना जिले में दोनों ही दल प्रचार में मतदाताओं को रिझाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाने लगे हैं। जहां भाजपा बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को पहले ही सक्रिय कर चुकी थी, अब कांग्रेस की ओर से बूथ स्तर पर अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए जुट गए हैं। प्रचार को गति देने के लिए दोनों दलों की ओर से सोशल मीडिया का भी सहारा लिया जा रहा है। जिले में उम्मीदवारों और पार्टी की ब्रांडिंग को देखें तो कांग्रेस इसमें पिछड़ रही है। 

जिले में भाजपा ने बूथ स्तर पर अपना होमवर्क पहले ही दौर में पूरा कर लिया था। भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ता घर-घर पहुंचकर लोगों से मिलकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने की अपील कर चुके थे। अब भाजपा दूसरे और तीसरे दौर का प्रचार भी पूरा करने के बाद अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। इसका कारण भी स्पष्ट है कि भाजपा इस दफा केंद्र में पार्टी की सत्ता आने की संभावना बताकर अपने प्रत्याशी की अहमियत का अहसास भी मतदाताओं को कराने के प्रयास में है। जिले के सभी पांचों विस हलकों में भाजपा लोगों तक अपनी अपील को भी पहुंचा रही है और केंद्र की मोदी सरकार की अहमियत बताकर मोदी के नाम पर भी वोट की चाहत में है।

उधर कांग्रेस भी अंतिम दौर के प्रचार में पूरी ताकत झोंकती दिखाई पड़ रही है। अब तक शहरों और गांवों की गलियों तक पोस्टर और बैनर हाथ में लिए भाजपा के कार्यकर्ता हर तरफ नजर आ रहे थे, लेकिन कांग्रेस की टोलियां भी मैदान में उतरकर भाजपा के चुनाव प्रचार को टक्कर देने के लिए मैदान में आ गई हैं। कांग्रेस की ओर से अपने प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार सामग्री के अलावा साल के 72 हजार रुपये गरीब

परिवारों को देने के वादे को भुनाने की फिराक में है। कांग्रेस के इस 72 हजार के प्रस्ताव का प्रचार खासकर ग्रामीण इलाकों में किया जा रहा है। दोनों ही प्रमुख दलों ने सोशल मीडिया में भी जमकर प्रचार शुरु कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक दूसरे की काट निकालने और अपने मुद्दों में वोटरों का समर्थन पाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

सोशल मीडिया में कांग्रेस के समर्थकों की ओर से भाजपा प्रत्याशी को पांच साल के कार्यकाल का हिसाब मांगने के अलावा उनकी क्षेत्र से रही दूरियों के मुद्दों पर बहस हो रही है। हालांकि भाजपा की ओर से कांग्रेस के पुराने इतिहास और भाजपा और कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवारों के रूतबे को भुनाया जा रहा है। मुददों से पूरी तरह दूर हो चुके इस चुनाव में अब मुददे गौण हो गए हैं, जबकि व्यक्तिगत छवि और प्रमुख नेताओं की कार्यकुशलता को लेकर सोशल मीडिया पर बहस आम हो रही है।

ऊना जिले में अगर बात करें तो कांग्रेस के करीब पचास लोगों की टीम भाजपा के इतने ही सोशल मीडिया के सक्रिय साथियों के मुकाबले में लगी हुई है। स्थानीय स्तर के मुद्दों से हटकर वे केंद्र स्तर के मुद्दों पर क्रिया-प्रतिक्रिया हो रही है। प्रचार के मामले में भाजपा ने जिस तरह से अपने उम्मीदवार की ब्रांडिंग में बढ़त बनाई है शायद कांग्रेस ब्रांडिंग के मामले में कहीं पिछड़ी नजर आई है। 

 

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Posted By: Babita

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