संवाद सहयोगी, ऊना : कोविड संक्रमण बढ़ने के बाद लगी पाबंदियों के चलते रविवार को परिवहन सेवा डांवाडोल रही। भीषण ठंड और कोविड की बंदिशों के प्रभाव से यात्रियों की संख्या भी बेहद कम देखी गई। जो लोग घर से गंत्वयों की ओर निकले थे, उन्हें काफी देर तक सड़कों किनारे खड़ा रहना पड़ा। निजी बसें इक्का-दुक्का ही पर नजर आई।

जिला में वैसे निजी बसों के करीब 285 रूट हैं, लेकिन रविवार को सिर्फ 30-40 बसों की सेवा ही यात्रियों को मिली। एचआरटीसी ऊना की तरफ से लोकल व लंबी दूरी के 22 रूटों पर बस सेवा को बंद रखा गया। करीब 80-90 रूटों पर निगम की बसें चलीं। ऊना आइएसबीटी में दुकानें भी बंद थी और सवारियों की आमद बिलकुल कम जिससे बस चालक निराश ही नजर आए।

पूछते रहे यात्री, कब आएगी बस

किरन, रवि, ज्योति संतोषगढ़ से वाया नंगड़ा ऊना जाना चाहते थे। वहां कोई निजी काम था। घर से 12 बजे वीरभद्र चौक पर बस लेने तो आ गए लेकिन दो घंटे खड़ा होने के बाद भी बस नहीं मिली। उन्होंने कहा कि पास एक चिकित्सक की दुकान पर आए लोगों से पूछते रहे कि बस कब आएगी, जवाब तो मिल रहा था कि 20 मिनट के अंतराल पर इस मार्ग पर बस है, लेकिन रविवार को हालात बिलकुल विपरीत थे। कुछ ऐसा ही हाल संतोषगढ़ के बस अड्डा के पास भी था। यहां झुग्गी के लिए जाने वाले हरि राम और भलाण को जाने वाले सुखविद्र को बस का इंतजार था। इन्होंने बताया कि अकसर इस मार्ग पर आधे घंटे के अंतराल में बस सेवा मिल जाती थी, लेकिन डेढ़ घंटा खड़ा रहने पर भी बस नहीं मिल पाई। निजी बस संचालकों को करीब साढे़ चार लाख का घाटा

निजी बस आपरेटर्स एसोसिएशन जिला ऊना के अध्यक्ष राम किशन शर्मा ने बताया कि जिला में 285 रूटों में से 30-40 बसें ही सड़कों पर दौड़ी। सुबह बसों में सवारियों की संख्या नाममात्र थी जिसे देखते हुए अगले रूट रद कर किए। दोपहर बाद तो करीब 10 बसें ही विभिन्न रूटों पर दौड़ रही थीं। एक दिन में निजी बस संचालकों को करीब साढे़ चार लाख रुपये से ज्यादा का घाटा होने का आकलन है। रविवार के पूर्व निर्धारित था कि 22 के करीब रूट बंद रखेंगे। सवारियां कम आ रही थी, फिर भी लोकल और लंबी दूरी के करीब 90 रूट चलाए गए थे।

-सुरेश धीमान, आरएम एचआरटीसी ऊना।

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