संवाद सहयोगी, ऊना : दिवाली समेत अन्य त्योहारों के आगमन के बीच अगर यह कहें कि ऊनावासी बारूद के ढेर पर है तो यह गलत नहीं होगा। क्योंकि दिवाली के लिए पटाखों एवं आतिशबाजी सहित अन्य विस्फोटक पदार्थ टनों के हिसाब से ऊना पहुंच चुके हैं। एक करोड़ से ज्यादा के आर्डर दिए जा चुके हैं।

बड़ा सवाल यह है कि इतनी ज्यादा मात्रा में जानलेवा साबित होने वाली विस्फोटक सामग्री को रखने के नियम क्या हैं। इसे कहां रखा जाना चाहिए? यह किसी द्वारा तय नहीं किया गया। फिलहाल जिस दिवाली को श्रीराम के घर आगमन की खुशी में मनाया जाता है वह दिवाली उस दौर से लेकर आज के दौर तक उसी श्रीराम के भरोसे नजर आ रही है। इसका जीता जागता प्रमाण जिला में बिना किसी रोक-टोक पहुंच रहा विस्फोटक है। दिवाली से कई दिन पहले से पटाखों सहित आतिशबाजी का एक करोड़ रुपये से ज्यादा का स्टॉक छिपते छिपाते ऊना पहुंच चुका है। इसकी अनुमति या निगरानी किसकी है, हर वर्ष की तरह कहीं न कहीं दूर के ढोल साबित हो रही है। परिणामस्वरूप जिला में इस बारूद को अवैध रूप से बेचने का धंधा पनप रहा है।

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लगभग 40 किस्म के पटाखे बाजार में

सब जानते हैं कि हर वर्ष दिवाली पर पटाखों एवं आतिशबाजी का क्रम बढ़ता है। इस बार भी यह बढ़ा है तथा 40 किस्म के विस्फोटक पटाखे एवं आतिशबाजियां बाजार में बिक्री के लिए तैयार हैं। केवल दिवाली पर ही जिला के छोटे एवं बड़े पटाखा विक्रेता करोड़ों रुपये का व्यापार करते हैं। अपनी जेबें इस बारूद से भरने के चक्कर में न तो कोई इसकी बिक्री की नियमावली को मानना चाहता है और न ही कोई इसके चक्कर में पड़ना चाहता है। इसका पता इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पटाखा बिक्री के लिए किसी एक विक्रेता ने भी लाइसेंस लेना उचित नहीं समझा है। जबकि ऊना के बाजार में लगभग 40 किस्म के पटाखे एवं आतिशबाजी का स्टॉक पहुंच चुका है।

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टैक्स होता है अदा या मात्र दिखावा

दिवाली पर लोगों के मनोरंजन के लिए प्रयोग में आने वाले पटाखों की एवज में बड़े व्यापारी मोटी कमाई करते हैं। वर्तमान दौर में कोई भी अच्छा पटाखा या आतिशबाजी दस या पचास रुपये से कम कीमत में नहीं है। जिससे बड़े स्टॉक पर तो इसकी मोटी कमाई का अंदाजा भले ही लगाया जा सकता है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि इतनी बड़ी मात्रा में ऊना पहुंचने वाले विस्फोटक पदार्थ का कर कोई अदा भी करता है या मात्र दिखावे के लिए कुछ सामग्री का टैक्स अदा कर उसकी आड़ में बड़े टैक्स को चपत लगाई जा रही है? हालांकि इन पर टैक्स कटता है वो भी कितनी मात्रा में इसकी पुष्टि भी अभी तक सामने नहीं है।

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कांगड़ा हमीरपुर से आर्डर

जिला की सीमा से सटे कांगड़ा, हमीरपुर व बिलासपुर के कई पटाखा विक्रेता दिवाली से पूर्व विस्फोटक सामग्री की खरीदारी ऊना से करना पसंद करते हैं। इन जिलों के व्यापारियों द्वारा भी ऊना में ही एक करोड रुपये से ज्यादा के पटाखे का आर्डर हर साल दिया जाता है। जिन पर विभागीय नजर है या नहीं अभी तक कहना मुश्किल होगा।

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ईको फ्रेंडली आर्डर मात्र दस प्रतिशत

हर वर्ष ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने का अभियान जोरों पर रहता है लेकिन इसे मनाने के लिए संबंधित सामग्री बाजार में बहुत ही कम मिलती है। आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो मात्र दस प्रतिशत स्टॉक ही ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने के लिए उपलब्ध है। हालांकि यह ग्राहकों की डिमांड पर निर्भर है लेकिन विस्फोटक पदार्थो से चांदी कूटने वाले विक्रेता ईको फ्रेंडली सामग्री को तरजीह भी बहुत कम दे रहे हैं जिससे प्रदूषणमुक्त दिवाली सपना ही नजर आ रहा है।

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अभी तक किसी ने भी पंजीकरण नहीं करवाया है। अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-डॉ. राजेश जसवाल ऊना, एसडीएम।

Posted By: Jagran

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