संवाद सहयोगी, ऊना : कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के बंगाणा में एक बीघा जमीन योजना के अंतर्गत 229 कार्यो को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 104 पर कार्य चल रहा है जबकि 50 कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, कृषि, मत्स्य व पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि इस योजना के तहत पांच हजार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 1.50 लाख महिलाओं को जोड़ा जाएगा। इस योजना से राज्य की ग्रामीण आर्थिकी में बदलाव आएगा।

वीरवार को जारी एक बयान में वीरेंद्र कंवर ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर, आत्मनिर्भर व सशक्त बनाना है। जिस बंजर भूमि पर वह खेती-बाड़ी नहीं कर सकते, अब प्रदेश सरकार की सहायता से वह उस भूमि को खेती-बाड़ी योग्य बना सकते हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने शिमला से 21 मई, 2020 को इस योजना का शुभारंभ किया था, जिसको मनरेगा के साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। इस योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों की एक बीघा भूमि को सब्जी तथा फल उत्पादन के लिए बैकयार्ड किचन गार्डन के रूप में तैयार किया जाएगा। ऐसे सभी स्वयं सहायता समूह जो कार्ड धारक हैं, उन्हें एक लाख रुपये तक का लाभ सरकार की तरफ से उपलब्ध करवाया जाएगा।

योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए संबंधित पंचायतें, प्रस्ताव पारित करने के बाद उनको मनरेगा शेल्फ में शामिल करने के लिए खंड विकास अधिकारी को भेजेंगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को एक बीघा जमीन के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही पहाड़ी भूमि को समतल करना, पानी को चैनलाइज करना, एक वर्मी कम्पोस्ट पिट स्थापित करने, पौधे और बीज खरीदने के लिए अनुदान भी प्रदान किया जाएगा।

योजना की लाभार्थी थानाकलां निवासी रीता देवी ने बताया कि एक बीघा जमीन योजना के तहत पैसा स्वीकृत करवाकर बंजर पड़ी जमीन को खेती योग्य बनाया। मनरेगा के तहत जमीन में अब आम, सेब, नींबू, हल्दी, बैंगन, गोभी के पौधे लगाए हैं। इस योजना के तहत हमें काफी लाभ मिला है।

Edited By: Jagran