संवाद सहयोगी, ऊना : आदर्श मछुआरा आवास योजना के तहत पिछले दो साल में 25 मछुआरों को 1.30 लाख रुपये की दर से 32.50 लाख की राशि दी गई है जबकि नीली क्रांति योजना के तहत 10 मछुआरों को किश्ती, तम्बू, जैकेट, जाल आदि उपलब्ध करवाए गए। इसके अलावा 70 मछुआरों को जीवन रक्षक जैकेट प्रदान किए गए हैं। गत चार वर्ष में कुटलैहड़ क्षेत्र के 189 मछुआरों को मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से अनुदान पर जाल उपलब्ध करवाए गए हैं। यह जानकारी कृषि, पशुपालन एवं मत्स्य पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने दी।

रविवार को यहां जारी प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है और केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रदेश सरकार कृषि को बढ़ावा देने के साथ ही किसानों को बागवानी, पशु पालन व मत्स्य पालन के साथ जोड़कर उनकी आर्थिकी सुदृढ़ करने का प्रयास कर रही है।

मछली पालन का दिया जा रहा निश्शुल्क प्रशिक्षण

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत इस व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि के साथ-साथ उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत तीन लाख रुपये तक बैंक, ऋण, बीमा आदि सुविधाएं प्रदान करने का प्रविधान है। इसके अतिरिक्त मत्स्य व्यवसाय से जुड़े मूलभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के साथ-साथ मछली की गुणवत्ता पर विशेष बल दिया जाएगा। मत्स्य पालन में रुचि रखने वालों को जिला स्तर पर मत्स्य पालन का निश्शुल्क प्रशिक्षण प्रदान करने का प्रविधान है। इस योजना के तहत कुटलैहड़ के दो मछुआरों को पिछले साल मोटरसाइकिल प्रदान की गईं। मत्स्य पालन को पर्यटन से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है। मछली आखेट को टूरिज्म के रूप में प्रमोट करने के लिए मत्स्य पालन विभाग की ओर से लठियाणी में एंगलिग हट का निर्माण किया जा रहा है। सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर युवा मत्स्य पालन से जुड़ रहे हैं। मत्स्य अधिकारी बंगाणा सुरेंद्र ने बताया कि वर्ष 2020-21 में बंगाणा क्षेत्र के मछुआरों ने 37,860 किलोग्राम मत्स्य उत्पादन किया जिससे 5.57 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई।

Edited By: Jagran