यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 16, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
संस्कारों की भाषा है संस्कृत : रामपाल
संवाद सहयोगी, बंगाणा : उपमडंल बंगाणा के तहत सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय डोहगी में संस्कृ

संवाद सहयोगी, बंगाणा : उपमडंल बंगाणा के तहत सनातन धर्म आदर्श संस्कृत महाविद्यालय डोहगी में संस्कृत सप्ताह का शुभारंभ किया गया। इसमें राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामपाल भारद्वाज ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की। इस दौरान मुख्यअतिथि ने कहा कि संस्कृत संस्कारों की भाषा है। संस्कृत के ज्ञान से विश्व के सभी संस्कृतियों व विज्ञानों का ज्ञान हो जाता है। स्वतंत्रता से पूर्व अंग्रेजों ने भारत में अपनी शक्ति से अंग्रेजी शिक्षा को थोप दिया था। इस वजह से संस्कृत भाषा भारतीय समाज से दूर होती गई। आज फिर सभी को इस भाषा को अपनाने की जरूरत है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्थानीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भक्त वत्सल शर्मा ने कहा कि आगामी समय संस्कृत का है। संस्कृत का अध्ययन बहुत तेजी से विकसित हो रहा है। सरकार निरंतर इस पक्ष पर जोर दे रही है कि सभी विश्वविद्यालयों व छोटे विद्यालयों में संस्कृत भाषा की पढ़ाई हो। उन्होंने जनता से भी आग्रह किया कि वे भाषा के रूप में संस्कृत अपनाएं ताकि भारतीय होने की पहचान बनी रहे।
कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने संस्कृत भाषा में प्रस्तुतियां भी पेश की। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. केदार दत्त पुरोहित तथा संचालन डॉ. कृष्ण मोहन पांडेय ने किया। इस अवसर पर डॉ. मथुरादास शर्मा, डॉ. भाग ¨सह पठानिया, डॉ. रविदत्त शर्मा, डॉ. रा¨जद्र कुमार शर्मा, डॉ. मुकेश शर्मा, डॉ. चंद्रकातु शर्मा व सुरेश कुमार आदि उपस्थित रहे।
