संवाद सूत्र, कुनिहार : ग्राम पंचायत पट्टा बरौरी के निर्माणाधीन बांके बिहारी मंदिर में पांच दिवसीय श्रीमद्भागवत माला कथा के चौथे दिन आचार्य हरि महाराज ने प्रवचन किए। उन्होंने कहा कि सभी को प्रभु भक्ति के लिए समय निकालना चाहिए। शिष्यों तथा भक्तों से आग्रह किया कि वे भगवान को सच्चे मन से याद करें। भगवान उनके कण-कण में बसता है। गुरु शिष्य परंपरा आदि अनादि काल से ही चली आ रही है। सनातन पुरातन संस्कृति जिसे गुरु शिष्य परंपरा के कारण ही विश्व गुरु का दर्जा प्राप्त है। भारत में लाखों वर्षों से गुरु को सर्वोच्च राजनीतिक और अध्यात्मिक मान्यता प्रदान की गई है। गुरु की आज्ञा और कृपा से ही राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक कौशल का प्रयोग राजा द्वारा किया जाता था। वशिष्ठ ऋषि सूर्यवंश के गुरु थे और अयोध्या का शासन इन्हीं के मार्गदर्शन से चलता था और भगवान श्री राम अपने गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र के प्रिय मित्र थे। इस अवसर पर ख्यालीराम, डीडी कश्यप ,अमर सिंह कौंडल, ज्ञानचंद, रामचंद्र शर्मा, ज्ञानचंद, देवी दास शर्मा, संत राम कौंडल, पदम देव, देव राज, श्यामानंद शांडिल, जगदीश पंवर, गोदावरी देवी, गीता देवी, मीरा, जयदेव ,अमर लाल, सोहनलाल, राम दिया, जीतराम ,केसरा राम ,प्रमिला कौशल, प्रधान ग्राम पंचायत पट्टाबरौरी व श्रीराम कौशल मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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