'देश में हो रहे आंदोलन प्रेशर कुकर की सीटियां', कसौली लिटफेस्ट में बोले पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे; अग्निवीर पर भी दी राय
पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने कसौली लिटफेस्ट में आंदोलनों को 'प्रेशर कुकर की सीटी' बताया और अग्निवीर योजना में बदलाव की संभावना जताई।

कसौली क्लब में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में भाग लेने पहुंचे पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे। जागरण
HighLights
आंदोलन समाज के प्रेशर कुकर की सीटी के समान।
अग्निवीर योजना में बदलाव की गुंजाइश हमेशा रहती है।
दो नए मित्रों से अच्छा एक पुराना दोस्त होता है।
संवाद सहयोगी, कसौली (सोलन)। देश में चल रहे आंदोलनों पर उन्होंने कहा कि समाज भी प्रेशर कुकर की तरह है, जिसमें प्रेशर बढ़ते ही सीटी बजकर प्रेशर रिलीज होता है। इसलिए जो लोग मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं उन्हें करने देना चाहिए, ताकि समाज का प्रेशर बाहर आता रहे। आंदोलन के कारणों का पता लगाकर उसको हल करने के भी प्रयास करने चाहिए। पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने हिमाचल प्रदेश के कसौली में 15वें लिटफेस्ट के दौरान यह बात कही।
नरवणे ने कहा कि हमारे पड़ोसी देशों में कुछ वर्ष से कई तरह के आंदोलन चल रहे हैं, लेकिन हमारा देश फिर भी आगे बढ़ रहा, अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है। इसका मतलब कुछ तो हम सही कर रहे हैं। आज हम चीन की बराबरी की अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहे हैं, व्यापार में भी। पहले हम डिफेंस पीएसयू के सहारे थे, लेकिन आज बहुत सारे निजी उद्योग इसमें आए हैं, तब से इसमें तेजी आई है।
अग्निवीर पर बोले, कोई भी योजना 100 प्रतिशत सही नहीं
अग्निवीर के सवाल पर कहा कि कोई भी योजना सौ प्रतिशत सही नहीं होती। उसमें बदलाव की गुंजाइश रहती है और यदि इसमें बदलाव की जरूरत है तो होना चाहिए।
दो नए मित्रों से एक पुराना अच्छा
नरवणे ने कहा कि दो नए मित्रों से अच्छा एक पुराना दोस्त होता है। इसलिए हमें देखना चाहिए कि कौन मित्र देश हमारा बुरे समय में साथ देता आया है। नरवणे कसौली क्लब में भारत का सच्चा मित्र देश कौन है, के प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
उन्होंने कहा, हर देश के साथ संवाद होना चाहिए। उदाहरण दिया कि अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध चल रहा है लेकिन बातचीत भी चल रही। इसी तरह रूस व यूक्रेन के बीच भी युद्ध जारी है, लेकिन संवाद भी चल रहा।
केएसएलएफ फारएवर यंग की शुरुआत
नरवणे ने लिटफेस्ट में केएसएलएफ फारएवर यंग की शुरुआत की। यह पहल युवा और उभरते लेखकों को लेखन के प्रति प्रेरित करने के उद्देश्य से की है। नरवणे ने कहा कि निडर होकर लिखें, लेकिन जिम्मेदारी के साथ।
मिजोरम शांति समझौते की वर्षगांठ का नहीं मनाया जश्न
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के पहले दिन कई विषयों पर 10 से अधिक सत्र हुए। पहले दिन की शुरुआत सरबप्रीत सिंह के सत्र से हुई। फेस्ट के निदेशक व खुशवंत सिंह के बेटे राहुल सिंह ने कहा कि खुशवंत सिंह अनुशासनप्रिय होने के साथ हास्यबोध के बेजोड़ उदाहरण थे। इस दौरान मिजोरम के संघर्ष, शांति व राजनीतिक सफर पर आधारित सत्र मिजोरम: फ्राम बैटलफील्ड टू बैलेट बाक्स आकर्षण का केंद्र रहा। लेखक संजोय हजारिका ने किताब लालथनहवला: द बाय फ्राम जरकावत एंड द मेकिंग आफ मिजोरम के हवाले से राज्य के अतीत व वर्तमान पर विस्तार से चर्चा की।
संपादक प्रीति गिल द्वारा संचालित इस सत्र में मिजोरम में विद्रोह के दौर से लोकतंत्र तक के सफर व मानवीय संवेदनाओं के कई अनछुए पहलू सामने आए। वर्ष 1986 में भारत सरकार व एमएनएफ के बीच मिजो शांति समझौता हुआ और वर्ष 1987 में मिजोरम पूर्ण राज्य के रूप में स्थापित हुआ। इस शांति समझौते को 40 साल हो गए, लेकिन इसकी वर्षगांठ न तो राज्य में मनाई और न पड़ोसी राज्यों ने। चर्चा में वर्तमान क्षेत्रीय संकटों व मानवीय दृष्टिकोण पर भी मंथन हुआ।
इम्तियाज अली ने बयां किया बंटवारे का दर्द
फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने लिटफेस्ट में रेने सिंह के साथ बातचीत में कहा कि उनकी फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' की कहानी भारत के विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इम्तियाज अली ने बताया कि मशहूर गायक अमर सिंह चमकीला के जीवन पर फिल्म बनाने के दौरान इस कहानी की कल्पना सामने आई। उस समय विभाजन के दौरान भारी नुकसान झेलने वाले लोगों के साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत की गई थी।
इन्हीं बातचीत से इस कहानी ने आकार लिया। इम्तियाज अली ने कहा कि एक फिल्म निर्देशक के तौर पर मेरा काम अंतिम सत्य को सामने लाना और विभिन्न समुदायों के बीच प्रेम, आपसी सद्भाव व भाईचारे को बढ़ावा देना है।
