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सोलन, सुनील शर्मा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायकों पर बेशक काम अधिक बोझ पड़ गया हो, लेकिन कुछ लोग इसे अब भी नौकरी नहीं, जिम्मेदारी समझ कर निभा रहे हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है सोलन जिले की धर्मपुर पंचायत की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कुसुम लता ने। यहां सशक्त हाथों में नई पौध पल रही है। धर्मपुर पंचायत का सुक्खी जोहड़ी आंगनबाड़ी केंद्र अब प्रदेश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। कुसुम की बेहतर कार्यप्रणाली को देखते हुए उन्हें सीडीपीओ व पर्यवेक्षक ने मास्टर ट्रेनर बना दिया है।

धर्मपुर पंचायत में कुपोषण दूर करने बाद कुसुम संक्रमण से होने वाली बीमारियों को खत्म करने का प्रयास कर रही हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में प्रत्येक कार्यकर्ता को एक हजार दिन तक गर्भवती व बच्चे की देखरेख करनी होती है, लेकिन कई जगह इसे महज औपचारिकता ही समझा जाता है। लोगों ने बताया कि कुसुम इस समय अवधि के बाद भी जच्चा व बच्चा की मदद करती रहती है। गर्भवती तक पहुंच बनाए रखने का उनका शत-प्रतिशत रिकॉर्ड है। वह माताओं को डाइट, आराम की समय सारिणी, वजन की जांच व मल्टी फूड की जानकारी लिख कर देती हैं। सरकार जो भी योजना आंगनबाड़ी के लिए देती है उसे कुसुम पहले दिन से शुरू कर देती है।

590 जनसंख्या, सात गर्भवती

उनके क्षेत्र में 590 जनसंख्या है। अभी सात गर्भवती और 27 बच्चे तीन से छह माह के मध्य हैं। साथ ही 19 किशोर और 15 बच्चे अन्य वर्ग में पंजीकृत हैं।

प्री स्कूल एक्टिविटी की भी पूरी तैयारी

कुसुम के आंगनबाड़ी केंद्र में प्री नर्सरी तक की पढ़ाई करवाई जाती है। बच्चों के लिए दिवस विशेष पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। बड़े पोस्टर व चार्ट से पढ़ाया जाता है। हाईजेनिक होने की प्रक्रिया सिखाती हैं, ताकि कोई बच्चा संक्रमण से बीमार नहीं पड़े।

धर्मपुर सर्कल के अधीन 15 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। सुक्खी जोहड़ी केंद्र शत प्रतिशत बच्चों को सुरक्षित रखने में कामयाब रहा है। सभी गर्भवती के साथ पूरा समन्वय रहा है। कोई शिकायत नहीं मिली, बल्कि लोग प्रसंशा ही करते हैं। कुसुम के बेहतर कार्य को देखकर उन्हें मास्टर ट्रेनर बनाया गया है। -भूमिका जग्गी, पर्यवेक्षक व संरक्षण अधिकारी, धर्मपुर सर्कल।

Posted By: Rajesh Sharma

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