यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 21, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
चीन से तनाव बढ़ा तो जेई वैक्सीन पर संकट होना तय
चीन ने नई तकनीक से जो वैक्सीन बनाई है वह कसौली में उत्पादित वैक्सीन से बहुत सस्ती है। इससे यहां वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित हुआ।

सोलन, जेएनएन। चीन से चल रहा तनाव बढ़ता है तो देश में जेई वैक्सीन (जैपनीज इंसेफालाइटिस) की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। बॉर्डर पर भारत-चीन के बीच डोकलाम को लेकर कई दिनों से तनाव बना हुआ है। देश में दिमागी बुखार के इलाज के लिए चीन से जेई वैक्सीन को आयात किया जाता है।
पहले केंद्रीय अनुसंधान संस्थान कसौली (सीआरआइ) जिला सोलन में जेई वैक्सीन का उत्पादन होता था, लेकिन करीब दस वर्ष से उत्पादन बंद है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि चीन ने नई तकनीक से जो वैक्सीन बनाई है वह कसौली में उत्पादित वैक्सीन से बहुत सस्ती है। इससे यहां वैक्सीन का उत्पादन प्रभावित हुआ। हालांकि संस्थान इसको फिर शुरू करने के लिए प्रयासरत है।
मामला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास पेंडिंग है। ऐसे में यदि भारत-चीन का विवाद ज्यादा बढ़ जाता है तो पूरे देश में दिमागी बुखार के मरीजों पर संकट आ सकता है। सीआरआइ कसौली दक्षिण पूर्व एशिया का एकमात्र संस्थान रहा है, जहां दिमागी बुखार निरोधक टीके तैयार किए जाते थे। अब संस्थान में 2006-07 से इस वैक्सीन का उत्पादन बंद है। संस्थान में पहले माउस ब्रेन तकनीक से जेई वैक्सीन बनती थी, लेकिन अब
टिश्यू कल्चर विधि से निर्मित वैक्सीन चीन से आयात की जा रही है।
कई गुना सस्ती है चीनी वैक्सीन:
भारत में बनने वाली वैक्सीन का मूल्य 480 रुपये प्रति डोज था, जबकि चीन में निर्मित वैक्सीन की कीमत 28 से 30 रुपये प्रति डोज है। उत्तर प्रदेश सहित देश के कई राज्यों में दिमागी बुखार के अधिक मामले पाए जाते हैं।
