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हिमाचल में 150 प्रतिशत तक उछले दवाओं के कच्चे माल के दाम, फार्मा सेक्टर की बढ़ीं मुश्किलें

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:32 AM (IST)

दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) की कीमतों में 150% तक की वृद्धि से फार्मा उद्योग चिंतित है, जिससे उत्पादन लागत ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. दवाओं के कच्चे माल (एपीआई) के दाम 150% तक बढ़े।

  2. फार्मा उद्योग की उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है।

  3. पैरासिटामोल, मेटफार्मिन जैसी दवाओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका।

जागरण संवाददाता, सोलन। दवाओं की कीमतों पर नियंत्रण व मरीजों को समय पर दवा उपलब्ध करवाने की चुनौती के बीच दवाओं के कच्चे माल (एक्टिव फामास्यूटिकल इंग्रीडिएंट-एपीआई) के 150 प्रतिशत तक उछले दाम ने फार्मा उद्योग की चिंता बढ़ा दी है।

एपीआई, क्रिटिकल मैटीरियल, केमिकल और पैकिंग सामग्री के दाम कुछ महीने में 40 से 150 प्रतिशत तक बढ़ने का दावा किया जा रहा है। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन (आईडीएमए) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य सुमित सिंगला ने केंद्र सरकार से फार्मा उद्योग में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख कच्चे माल को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाने की मांग की है।

कहा, कच्चे माल की कीमतों के साथ उसकी ढुलाई का खर्च भी बढ़ा है। एपीआइ और अन्य जरूरी सामग्री महंगी होने से दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ रही है। एसीटोन, मेथेनाल और आइसोप्रोपिल अल्कोहल सहित कुछ प्रमुख रसायनों के दाम भी 40 से 150 प्रतिशत तक बढ़ने की बात कही जा रही है।

पैरासिटामोल और मेटफार्मिन की सप्लाई पर असर की आशंका
यदि कच्चे माल की उपलब्धता व कीमतों की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो पैरासिटामोल, मेटफार्मिन, हृदय रोगों में प्रयोग होने वाली दवाओं के उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।

सरकारी सप्लाई और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ऑर्डर समय पर पूरे नहीं होने पर दवा कंपनियों को आर्थिक क्षति के साथ अनुबंध संबंधी दायित्वों, संभावित हर्जाने का सामना भी करना पड़ सकता है।