सोलन, मनमोहन वशिष्ठ। काम के प्रति समर्पण और अपने कार्य के प्रति ईमानदारी के लिए आज भी कई लोगों की मिसाल दी जाती है, लेकिन एक अंग्रेज अधिकारी के स्वाभिमान के किस्से के बारे में कम लोग ही जानते होंगे। कोई व्यक्ति एक रुपये जुर्माने के लिए अपनी जान दे सकता है यह सुनकर आपको अजीब लगेगा, लेकिन बात जब स्वाभिमान से जुड़ी हो तो कई बार आदमी ऐसा कदम भी उठा लेता है। ऐसा ही कुछ हुआ था ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग के साथ। हालांकि जिंदगी में असफल होने पर आत्महत्या के कदम को सही नहीं ठहराया जा सकता है।

20वीं सदी में जब कालका-शिमला रेलवे लाइन बिछाने का कार्य चल रहा था तो बड़ोग की पहाड़ी में सुरंग निकालने का कार्य ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग की अध्यक्षता में चला। इस सुरंग को बनाने की जिम्मेदारी ब्रिटिश इंजीनियर कर्नल बड़ोग को दी गई थी। सुरंग बनाने के लिए कर्नल बड़ोग ने सबसे पहले पहाड़ का निरीक्षण किया। सुरंग बनाने के लिए दोनों छोर पर निशान लगाने के बाद मजदूरों को खोदने का ऑर्डर दिए। मजदूर दोनों छोर से एकसाथ खोदाई करने लगे। कर्नल बड़ोग इस बात से आश्वस्त थे कि खोदाई के दौरान दोनों सुरंगें बीच में आकर मिल जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अंग्रेजी हुकूमत को यह पैसे की बर्बादी लगी और उन्होंने कर्नल बड़ोग पर एक रुपया जुर्माना लगा दिया। बड़ोग इस बात से बेहद परेशान हो गए। एक दिन वह अपने कुत्ते को लेकर सुबह टहलने निकले व सुरंग के नजदीक ही खुद को गोली मार ली। बड़ोग को वर्तमान सुरंग के पास ही दफनाया गया है।

आज भी मौजूद है पुरानी सुरंग कर्नल बड़ोग जिस सुरंग का निर्माण कर रहे थे उसके छोर न मिलने के कारण सुरंग दोनों ओर से बंद कर दी थी। छोर पर गेट लगाकर उस पर ताला लगा दिया था। पुरानी सुरंग बड़ोग सुरंग के नजदीक ही है और लोग उस सुरंग को भी देखने जाते है। हालांकि घने जंगल में होने के कारण दिन के समय भी वहां जाने से भी डर लगता है।  

फिर बाबा भलकू ने की थी सुरंग पूरी करने में मदद कर्नल बड़ोग की मौत के बाद 1900 में सुरंग पर एचएस हर्लिगटन ने फिर से काम शुरू किया व 1903 में सुरंग पूरी तरह तैयार हो गई। ब्रिटिश सरकार ने इस सुरंग का नाम इंजीनियर कर्नल बड़ोग के नाम से ही रखा। बताते हैं कि एचएस हर्लिगटन भी इस सुरंग का काम पूरा नहीं कर पा रहे थे। सोलन जिला के रहने वाले बाबा भलकू ने इस काम को पूरा करवाया। बताते हैं कि बाबा भलकू ने कालका-शिमला रेललाइन पर अन्य सुरंगें खोदने में भी मदद की है।

देश की सबसे डरावनी सुरंग कहते हैं कि इंजीनियर की मौत के बाद यहा अप्रिय घटनाएं होने लगी थी। कई लोगों को इंजीनियर की आत्मा दिखाई देने लगी। सुरंग के अंदर से चिल्लाने की आवाजें सुनाई देती रहीं। अंधेरे के समय सुरंग के नजदीक जाने से भी लोग डरते हैं। सुरंग के अंदर घना अंधेरा रहता है, जिससे दिन के समय भी उसमें से पैदल गुजरने से लोग कतराते हैं। अपनी इन्हीं विशेषताओं के चलते बड़ोग सुरंग देश की सबसे डरावनी सुरंगों में शुमार है। इंटरनेट पर भी जब आप खोजेंगे तो डरावनी सुरंग के नाम से बड़ोग सुरंग सामने आती है।

 दुनिया की सबसे सीधी सुरंग कालका से 41 किलोमीटर दूर बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास ही बड़ोग सुरंग है जिसे सुरंग नंबर 33 भी कहते हैं। कालका-शिमला रेललाइन पर कुल 103 सुरंग हैं। बड़ोग सुरंग 1143.61 मीटर लंबी है और यह दुनिया की सबसे सीधी सुरंग है, जिसे पार करने में ट्रेन ढाई मिनट लेती है। एक किलोमीटर से लंबी अंधेरी सुरंग में से जब ट्रेन गुजरती है और पहाड़ी में उसकी आवाज शोर करती है तो रोमांच और भी बढ़ जाता है। बड़ोग रेलवे स्टेशन के पास पर्यटन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण है। स्टेशन पर पर्यटकों के खानपान की सुविधा है। रेलवे बोर्ड के गेस्ट हाउस भी यहां मौजूद है।

कई फिल्मों की हो चुकी है शूटिंग बड़ोग रेलवे स्टेशन पर कई फिल्मों व ¨हदी, पंजाबी गानों की शूटिंग हो चुकी है। 2005 में आई फिल्म 'यकीन' की शूटिंग रेलवे स्टेशन पर हुई है। इसमें अभिनेता अर्जुन रामपाल व अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा पर सीन फिल्माए गए थे। इसके अलावा 'सनम रे' फिल्म की भी शूटिंग हुई जिसमें अभिनेता पुलकित सम्राट व अभिनेत्री यामी गौतम के ट्रेन में शॉट फिल्माए गए थे। इसके अलावा कई विज्ञापनों की भी शूटिंग हुई है।