पाक सेना को चकमा देकर हथियार के साथ भारत लौटी थी जांबाज 'पेडोंगी', मिला था सम्मान; पूर्व सेनाध्यक्ष ने सुनाई वीरगाथा
सोलन के कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने 1971 के भारत-पाक युद्ध की वीरगाथाएं ...और पढ़ें
-1792865250958_m.webp)
पूर्व सेनाध्यक्ष मनोज मुकुंद नरवणे। फाइल फोटो
HighLights
पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे ने कसौली लिटफेस्ट में 1971 युद्ध की गाथाएं साझा कीं।
जांबाज खच्चर पेडोंगी पाकिस्तानी मशीन गन के साथ भारत लौटी थी।
खच्चर को युद्ध में असाधारण बहादुरी के लिए सम्मान मिला।
मनमोहन वशिष्ठ, कसौली (सोलन)। हिमाचल प्रदेश में सोलन के कसौली में आयोजित तीन दिवसीय खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की वीर गाथाएं भी साझा कीं।
उन्होंने भारतीय सेना की पेडोंगी नाम की एक जांबाज खच्चर का किस्सा सुनाया। कहा कि पेडोंगी पाकिस्तान के हथियार लेकर भारत लौटी थी। नरवणे अपनी किताब के 'द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज' विषय वाले सत्र में निरुपमा दत्त के साथ चर्चा कर रहे थे।
1971 युद्ध के अनसुने किस्से
नरवणे ने कहा कि भारत-पाक युद्ध के दौरान जम्मू-कश्मीर सेक्टर में भारतीय सेना का एक एनिमल ट्रांसपोर्ट काफिला पाकिस्तानी गोलाबारी की चपेट में आ गया था। पाकिस्तानी सेना ने भारतीय खच्चरों को कब्जे में ले लिया, जिसमें पेडोंगी भी शामिल थी।
पाकिस्तानी सेना ने पेडोंगी पर अपनी मीडियम मशीन गन व अन्य असलहा लाद दिया ताकि वे इसे अपनी चौकियों तक पहुंचा सकें। कई दिन पाकिस्तानी कब्जे में रहने के बाद पेडोंगी मौका मिलते ही कई किलोमीटर दूर भारत में अपनी कंपनी में लौट आई।
उसकी पीठ पर पाकिस्तानी सेना की एमएमजी व गोला-बारूद भी था। इस बहादुरी के लिए उसे सम्मान भी दिया गया। किताब में दाग-ए-शाही यानी डगशाई जेल की कहानी और सोलन ब्रूअरी का भी जिक्र है।
नरवणे ने कहा कि असम रेजिमेंट का प्रसिद्ध रेजिमेंटल मार्चिंग गीत 'बदलूराम का बदन', द्वितीय विश्व युद्ध में बलिदान हुए एक वीर सिपाही बदलूराम के अदम्य साहस व शहादत को समर्पित है। नरवणे ने उनकी आत्मकथा फोर स्टार्स आफ डेस्टिनी से जुड़े सवालों को यह कहते हुए टाल दिया कि यह किताब रक्षा मंत्रालय के पास समीक्षाधीन है। अगले साल तक उनकी मर्डर मिस्ट्री सिक्वल नाम से किताब आएगी।
मणिपुर हिंसा की रिपोर्टिंग की चुनौतियों पर भी हुई चर्चा
मणिपुर स्टोरीज: फायर दैट कुड नाट बर्न, सत्र में इस किताब की लेखिका होईहनु हौजेल के साथ लेखिका प्रीति गिल ने मणिपुर के हालात पर चर्चा की। हौजेल ने घर में आग लगाए जाने, तोड़फोड़ की घटना व अपनी पहचान के दस्तावेज खो चुके लोगों को दूसरे राज्यों में बसाने में मदद करने के अपने अनुभव साझा किए। सत्र के दौरान मणिपुर में हिंसा की रिपोर्टिंग करने में आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
