नाहन, जेएनएन। जिला सिरमौर के पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में सोमवार तड़के ही पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लाइनें लग गईं। कांग्रेस प्रत्याशी गंगूराम मुसाफिर ने सुबह नौ बजे के करीब मतदान किया। इस बार पच्छाद की जनता अपना 16वां विधायक चुन रही है। शाम पांच बजे पांच प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद हो जाएगा। जीत का सेहरा किसके सिर सजेगा, यह 24 अक्टूबर को पता चलेगा।

सोमवार को पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए कई मतदान केंद्रों पर मतदाता पूर्व में होने वाले मतदान की तरह 7:00 बजे ही पहुंच गए थे। जब वह मतदान केंद्र पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि मतदान केंद्र बंद है। फिर उन्होंने वहां पर सूचना पट पर 8:00 का समय देखा, तो वह 8:00 बजे तक वही इंतजार किया। मानगढ़ पोलिंग बूथ पर ईवीएम बहुत धीरे चल रही थी। वीवीपैट की तकनीकी खराबी के चलते ईवीएम को ही बदला गया। जिसके चलते वहां पर मतदाताओं की लाइनें लग गईं। जिसके बाद वहां पर मतदान को रोककर दोबारा नई मशीन लगाकर मतदान शुरू करवाया गया।

इसके अतिरिक्त निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाताओं के घर पर पहुंचाई मतदाता की पर्ची को लेकर अधिकतर मतदाता मतदान केंद्र पहुंचे। जिस कारण कई मतदाताओं को वापस घर जाकर आई कार्ड लेकर आने पड़े। मतदाताओं का कहना था कि जब निर्वाचन विभाग ने उन्हें यह पर्ची दी है, जिसमें सारी जानकारी है, तो फिर इसे माना क्यों नहीं जाता। पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में मौसम ठंडा होने के कारण 8 से 9 बजे तक केवल आठ फीसद मतदान ही दर्ज हुआ। 2017 की विधानसभा चुनाव में पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में 79.84 प्रतिशत मतदान हुआ था। 

सरकार व भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका पच्छाद सीट के उपचुनाव पर मंत्रियों ने जमकर प्रचार प्रसार किया। कांग्रेस ने मंत्रियों पर आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामले भी दर्ज करवाए। हालांकि सभी मामलों में निर्वाचन विभाग ने भाजपा को क्लीनचिट दे दी। यहां कांग्रेस के पास खोने को कुछ नहीं है, जबकि भाजपा की सरकार सत्ता में है। ऐसे में पार्टी ने इस उपचुनाव को जीतने के लिए पुरजोर कोशिश की है। उपचुनाव में वैसे तो पांच प्रत्याशी भाग्य आजमा रहे हैं, मगर मुकाबला कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय दयाल प्यारी के बीच ही है।

1952 से मई 2019 तक पच्छाद के विधायक 

1952 से 1956,डॉ. वाइएस परमार

1957 से 1962,मांगा राम

1962 से 1967,माताराम

1967 से 1972,जालम सिंह

1972 से 1977,जालम सिंह

1977 से 1982,जख्मी राम

1982 से 1985,गंगूराम मुसाफिर

1985 से 1990,गंगूराम मुसाफिर

1990 से 1992,गंगूराम मुसाफिर

1993 से 1998,गंगूराम मुसाफिर

1998 से 2002,गंगूराम मुसाफिर

2003 से 2007,गंगूराम मुसाफिर

2007 से 2012,गंगूराम मुसाफिर

2012 से 2017,सुरेश कश्यप

2017 से मई 2019,सुरेश कश्यप

Posted By: Rajesh Sharma

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