नाहन, जेएनएन। हिमाचल के अब तक के सबसे बड़ा कर चोरी मामला अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और सीबीआइ को सौंपा जाएगा। इंडियन टेक्नोमेक मामले में टैक्स चोरी के गड़बड़झाले में मनी लॉड्रिंग का मामला भी सामने आया है। आबकारी एवं कराधान विभाग ने इस संबंध में प्रदेश सरकार से आग्रह किया है।

विभाग ने 2200 करोड़ रुपये की रिकवरी के लिए चार साल बीतने के बाद मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपने का निर्णय लिया है। सूत्रों के अनुसार किसी भी मामले की ईडी और सीबीआइ की जांच से पहले पुलिस के पास केस दर्ज करवाना अनिवार्य होता है, लिहाजा रविवार को कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाया गया था। पहली मार्च, 2018 को विभाग ने इस मामले को ईडी और सीबीआइ को सौंपने के लिए पत्र लिखकर आग्रह किया था। इसके जवाब में ईडी और सीबीआइ ने पूछा कि क्या मामला पुलिस में दर्ज है। इस पर सिरमौर के अधिकारियों ने माजरा पुलिस थाने में इंडियन टेक्नोमैक कंपनी के प्रबंध निदेशक सहित तीन अन्य निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पुलिस को सौंपे गए 14 पन्नों के दस्तावेजों में बताया गया है कि कंपनी से जो राशि प्रदेश सरकार को राजस्व के रूप में मिलनी थी, उसको दूसरी कंपनियों में लगा दिया गया। दूसरे राज्यों में प्रॉपर्टी भी खरीदी।

17 दिसंबर, 2016 को विभाग के अधिकारियों ने डीएसपी सीआइडी के साथ इस मामले में चर्चा की, जबकि सीआइडी पहले ही मामले में हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड की ओर से छानबीन कर रही थी। सीआइडी ने भी मामले को ईडी को देने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि ईडी को मामला देने से पहले कंपनी निदेशकों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करवाना होगा। विभाग ने ईडी और सीबीआइ को लिखे पत्र में बताया कि कंपनी के निदेशकों ने आबकारी एवं कराधान विभाग के 2175.51 करोड़, विभिन्न बैंकों के 2300 करोड़, इनकम टैक्स के 750 करोड़, ईपीएफ, बिजली बोर्ड और श्रम विभाग में करीब 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है।

 

Posted By: Babita