राजन पुंडीर, नाहन

सिरमौर जिला में इस बार की दिवाली मेड इन सिरमौर प्रोजेक्ट के तहत तैयार की गई गोमय ज्योति व सिरमौरी लाइट से रोशन होगी। जिला प्रशासन के सहयोग से स्वयं सहायता समूह की 15 महिलाएं इन दिनों गोबर के दीये व सिरमौरी लाइट बनाने में व्यस्त हैं। जिला प्रशासन की ओर से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए की गई पहल कारगर साबित हो रही है। उपायुक्त के मार्गदर्शन में अरावली संगठन की ओर से स्वयं सहायता समूह की महिलाएं मेड इन सिरमौर प्रोजेक्ट के तहत इस काम में जुटी हैं।

उपायुक्त सिरमौर डा. आरके परूथी ने बताया कि जिला में बेसहारा पशुओं की समस्या के निदान के लिए गोबर व गोमूत्र का सही प्रयोग करने की प्रेरणा से गोबर के दीये बनाने का विचार आया। जिला में चल रहे गोसदनों को सरकार के अधीन मंदिरों की आय से गोशाला के संचालन के लिए 15 फीसद की राशि दी जाती है। गोसदन मंदिर से मिलने वाली राशि पर निर्भर न रहे, वह भी आत्मनिर्भर बने यह प्रयास किया जा रहा है।

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गोमय ज्योति पैकेट में मिलेगी ये सामग्री

गोमय ज्योति पैकेट में 11 दीये, एक छोटी बोतल तिल का तेल, माचिस व कपास की 11 बातियां मिलेंगी। जिला प्रशासन ने नाहन में काउंटर सेल में 90 रुपये प्रति पैकेट रेट रखा है। इसके अतिरिक्त गोबर से बना पोर्ट (गमला), चूल्हा व हमाम में जलाने के लिए लोगस बनाए जा रहे हैं। अरावली संगठन के निदेशक डा. यशपाल शर्मा ने बताया कि गोबर के दीये व लड़ियां बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया गया है।

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मेड इन सिरमौर के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। इससे जहां महिलाओं को रोजगार मिलेगा। वहीं, लोग भी अपने पशुओं को बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। गोबर से बनने वाले दीये व लड़ियां दिवाली से दो सप्ताह पहले बाजार में उपलब्ध होंगी।

-डा. आरके परूथी, उपायुक्त सिरमौर।

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